
17 July : दुनिया भर में प्रदूषण को कम करने और ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए यातायात के साधनों को पूरी तरह बदलने की तैयारी चल रही है. इसी कड़ी में सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम (India first Hydrogen Train) भारत ने भी उठा लिया है, दरअसल आज देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच अपनी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई.
लेकिन इस तकनीकी क्रांति के बीच हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर यह एडवांस ट्रेन दुनिया के किन-किन देशों में पहले से चल रही है, और वह कौन सी जादुई तकनीक है जिसके दम पर बिना डीजल और बिना बिजली के तारों के यह भारी-भरकम ट्रेन पटरियों पर दौड़ने लगती है.
किन देशों में पहले से ही दौड़ रही है ये ट्रेन?(India first Hydrogen Train)
दरअसल हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक अब सिर्फ कोई कल्पना नहीं रह गई है बल्कि दुनिया के कई विकसित देशों में यह हकीकत बन चुकी है. इस रेस में सबसे आगे जर्मनी है, जिसने साल 2018 में ही दुनिया की पहली कमर्शियल हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन शुरू कर दिया था. इसके बाद साल 2022 में जर्मनी ने पूरी तरह से हाइड्रोजन से चलने वाले रूट की शुरुआत की.
जर्मनी के बाद चीन ने भी एशिया की पहली हाइड्रोजन पावर्ड पैसेंजर ट्रेन लॉन्च करके दुनिया को चौंका दिया था. वहीं फ्रांस, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश भी इस तकनीक पर तेजी से काम कर रहे हैं और कई रूट्स पर इनके सफल ट्रायल पूरे हो चुके हैं. अब भारत भी इस बेहद खास और चुनिंदा क्लब में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है.
कैसे काम करती है यह फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी?
इस ट्रेन (Hydrogen Train) को चलाने के पीछे जो सबसे मुख्य तकनीक काम करती है, उसे हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी कहा जाता है. इसे आप एक तरह का चलते-फिरते पावर प्लांट की तरह समझ सकते हैं. ट्रेन के डिब्बों के ऊपर बेहद मजबूत और सुरक्षित स्टोरेज सिलेंडर लगाए जाते हैं, जिनमें कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस भरी होती है.
जब ट्रेन को चलाना होता है, तो यह हाइड्रोजन गैस सीधे फ्यूल सेल के अंदर भेजी जाती है. इसी समय फ्यूल सेल बाहर के वातावरण से प्राकृतिक ऑक्सीजन को अपने अंदर खींचता है. जब हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का फ्यूल सेल के भीतर मिलन होता है, तो इनके बीच एक केमिकल रिएक्शन होता है. इस इलेक्ट्रोकेमिकल प्रोसेस के जरिए भारी मात्रा में बिजली पैदा होती है.
क्यों नहीं निकलता जहरीला धुआं?(Indian Railway Hydrogen Train)
बता दें कि फ्यूल सेल के अंदर रासायनिक क्रिया से जो बिजली पैदा होती है, उसे तुरंत ट्रेन के नीचे लगी बेहद शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर्स में ट्रांसफर कर दिया जाता है. यह मोटर्स पहियों को घुमाती हैं और ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पकड़ लेती है. इस पूरे प्रोसेस की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें कोयले, डीजल या पेट्रोल की तरह कुछ भी जलता नहीं है.
दरअसल जब हाइड्रोजन और ऑक्सीजन आपस में मिलते हैं, तो बिजली के साथ-साथ सिर्फ पानी और गर्म हवा ही बाहर निकलते हैं. यही वजह है कि इस ट्रेन के साइलेंसर से जहरीले धुएं के बजाय केवल पानी की शुद्ध भाप निकलती है, जिससे पर्यावरण को रत्ती भर भी नुकसान नहीं पहुंचता है.


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