
दिल्ली , 17 July : देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों शिक्षा व्यवस्था और नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का जो आंदोलन चल रहा है, उसे लेकर सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है. दरअसल पिछले अठारह दिनों से अनशन पर बैठे लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में इंटरनेट पर ‘बहती हवा सा था वो’ जैसे गानों के साथ रील्स की बाढ़ सी आ गई है.
कुछ वामपंथी विचार के लोगों के साथ बॉलीवुड के चुनिंदा कलाकार और खुद थ्री इडियट्स फिल्म में चतुर का किरदार निभाने वाले ओमी वैद्य जनता से यह कहकर समर्थन मांग रहे हैं कि ‘असल जिंदगी के फुंसुख वांगडू को मरने मत दो’. लेकिन क्या वाकई सोनम वांगचुक ही थ्री इडियट्स के असली फुंसुख वांगडू यानी रैंचो हैं?
वहीं जब इस भावनात्मक प्रचार के पीछे छिपे तथ्यों और जमीनी हकीकत की पड़ताल की गई, तो जो सच सामने आया वह आपको पूरी तरह हैरान कर देगा.
बेहद रसूखदार राजनीतिक परिवार से है नाता(Sonam Wangchuk Family Background)
सोशल मीडिया पर इंफ्लुएंसर्स यह झूठ भी जमकर फैला रहे हैं कि फिल्म के किरदार की तरह सोनम वांगचुक भी बेहद गरीब परिवार से आते हैं और उनके नाम चार सौ पेटेंट दर्ज हैं. जबकि हकीकत में सरकारी और आधिकारिक रिकॉर्ड खंगालने पर पता चलता है कि सोनम वांगचुक के नाम ऐसा कोई पेटेंट दर्ज नहीं है.
बता दें कि यह दावा सिर्फ फिल्म के काल्पनिक किरदार को सच मान लेने के कारण फैलाया गया. और रही बात गरीबी की तो सोनम वांगचुक कोई साधारण या गरीब व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे लद्दाख के बेहद प्रभावशाली राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता सोनम वांग्याल वर्ष 1972 में लेह से कांग्रेस के विधायक थे और 1975 में जम्मू-कश्मीर सरकार में राज्यमंत्री भी रह चुके हैं.
खुद आमिर खान और राजकुमार हिरानी ने खोल दी पोल
यह भी बताते चलें इस मुद्दे(Sonam Wangchuk News) पर खुद सोनम वांगचुक ने सालों पहले सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि वे फुंसुख वांगडू नहीं हैं और फिल्म मेकर्स ने उनसे कोई सलाह नहीं ली थी. उन्होंने तो यहां तक आरोप लगाया था कि फिल्म की टीम उनके स्कूल में चुपचाप शूटिंग करने आई थी.
इसके बाद में फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी और मुख्य अभिनेता आमिर खान ने भी आधिकारिक बयानों में साफ कर दिया था कि रैंचो का किरदार सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था बल्कि वह एक ऐसे व्यक्ति से प्रेरित था जो फिल्म मेकिंग में आना चाहता था लेकिन उसे एफटीआईआई में दाखिला नहीं मिला था.
कोर्ट कचहरी के चक्कर में क्यों फंसे एक्टिविस्ट?(Sonam Wangchuk News)
पर्यावरण और शिक्षा की बात करने वाले सोनम वांगचुक के दामन पर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के दाग भी लगे हुए हैं. उन पर आरोप है कि उनके संस्थान हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग यानी एचआईएएल ने लद्दाख प्रशासन द्वारा आवंटित करीब 135 एकड़ जमीन का वर्षों तक करोड़ों रुपया किराया नहीं चुकाया, जिसकी बाजार कीमत लगभग तीस करोड़ रुपये आंकी गई है.
इसके अलावा उन पर चौदह करोड़ रुपये की प्रीमियम राशि को नियम विरुद्ध तरीके से माफ कराने का दबाव बनाने का भी गंभीर आरोप लगा था.
सुरक्षा और विदेशी फंडिंग पर उठे गंभीर सवाल
सोनम वांगचुक और उनकी संस्थाओं की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब विदेशी फंडिंग नियमों यानी एफसीआरए के गंभीर उल्लंघन को लेकर उनके खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच शुरू हुई. जांच में खुलासा हुआ कि उनके संस्थान ने एफसीआरए पंजीकरण मिलने से पहले ही करीब डेढ़ करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग हासिल कर ली थी और उनके कुल सात बैंक खातों में से चार खातों की जानकारी छिपाई गई थी. खुद वांगचुक के नौ व्यक्तिगत बैंक खातों में से आठ का खुलासा नहीं किया गया था.


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