
जम्मू, 13 Aug : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में चशोती में आई विनाशकारी बाढ़ को एक साल बीत गया है, लेकिन उस त्रासदी के जख्म आज भी ताजा हैं। इस आपदा ने SSB के हेड कॉन्स्टेबल हुसन दास से एक साथ सब छीन लिया। उनकी पत्नी, दो बच्चों, मां, बहन, दो भतीजों और भाभी की मौत हो गई। एक ही परिवार के इतने करीबियों को खोने का यह दर्द ऐसा है, जिसे समय भी कम नहीं कर सका।
जम्मू के RS पुरा सेक्टर के बेनागढ़ गांव में 38 साल के दास का घर ज़्यादातर समय बंद रहता है। जब यह हादसा हुआ था तब दास बिहार में तैनात थे, उन्होंने अपने बच्चों को आखिरी बार 14 अगस्त 2025 को वीडियो कॉल पर देखा था। जब परिवार मचैल माता के दर्शन करके लौट रहा था। उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि वह छोटी सी वीडियो कॉल ही उनकी बच्चों से आखिरी मुलाक़ात साबित होगी।
आंसू रोकते हुए दास ने बताया कि उस मनहूस दिन की सुबह मेरी बच्चों से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। वे मंदिर में दर्शन करके लौट रहे थे। कॉल के बाद कि वह सुबह करीब 9 बजे ड्यूटी पर चले गए थे और तीन घंटे से भी ज़्यादा समय बाद, उन्हें इस त्रासदी के बारे में पता चला।
चशोती त्रासदी में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई
14 अगस्त, 2025 दोपहर करीब 12 बजे के आसपास मचैल माता मंदिर के रास्ते पर पड़ने वाले आखिरी गांव ‘चशोती’ में अचानक बादल फटने से बाढ़ और भूस्खलन आ गया था। पानी का तेज़ बहाव बस्ती में घुस गया और चारों ओर मौत और तबाही का मंज़र फैल गया। इस हादसे में 63 लोगों की मौत हो गई थी।
सिर्फ़ पत्नी का शव ही मिल पाया
दास ने कहा, ‘मैंने अपने परिवार से संपर्क करने की बहुत कोशिश की, लेकिन उनके फ़ोन बंद थे।’ दास का परिवार 12 अगस्त को मचैल माता की यात्रा पर गया था। उनके परिवार में पत्नी मुमता रानी (35), बेटी अनांसी मेहरा (8), बेटा अर्शिल (5) और माँ जीतो देवी (72) शामिल थीं। उनके साथ उनकी बहन जिनी देवी (42), बहन का बेटा रितिक मेहरा (10) और बेटी पेहू (15) और रेशम गढ़ की रहने वाली भाभी राही मेहरा (32) भी थीं।’
दास ने बताया, ‘वे मेरा परिवार थे। सिर्फ़ मेरी पत्नी का शव ही मिल पाया, जबकि बाकी लोगों का कुछ पता नहीं चल सका।’ उन्होंने कहा, ‘मेरी यूनिट ने लापता लोगों की तलाश में हिस्सा लिया, लेकिन वे नहीं मिल सके।’ सर्च टीमों ने प्रभावित इलाके में एक महीने से ज़्यादा समय तक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन लापता लोगों को कभी आखिरी विदाई नहीं मिल सकी।
RTI से सामने आई चसोती आपदा की पूरी तस्वीर
जम्मू के एक्टिविस्ट रमन कुमार शर्मा की ओर से किश्तवाड़ ज़िला प्रशासन के पास दायर RTI अर्ज़ी से इस आपदा की आधिकारिक जानकारी मिली है। शर्मा के अनुसार, ज़िला प्रशासन ने पुष्टि की कि इस त्रासदी में 63 लोगों की मौत हुई, 127 लोग घायल हुए और 30 लोग लापता हो गए।
RTI के जवाब में यह भी बताया गया कि मृतकों के लिए ‘स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फंड’ के तहत 2.52 करोड़ रुपये मंज़ूर किए गए थे, जिसकी गणना प्रति मृतक 4 लाख रुपये के हिसाब से की गई थी।
दास के परिवार में सिर्फ़ 80 साल के पिता बचे
दास ने कहा कि उन्हें सिर्फ़ अपनी पत्नी के लिए मुआवज़ा मिला क्योंकि दस्तावेज़ी सबूतों से सिर्फ़ उन्हीं की मौत की पुष्टि हो सकी, बाकी लोगों के लिए कोई राहत नहीं दी गई। दास कहते हैं, ‘कोई भी मुआवज़ा परिवार को वापस नहीं ला सकता।’ अब बस उनके बिना जीने का संघर्ष ही बचा है।’ इस त्रासदी के बाद, दास के परिवार में अब सिर्फ़ उनके 80 साल के पिता मंगल दास बचे हैं
जिस परिवार में कभी उनके बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन और पत्नी शामिल थे, वह अब बहुत छोटा हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी नौकरी जारी रखनी है, अपने बूढ़े पिता की देखभाल करनी है और किसी तरह लगभग पूरे परिवार को खोने का भारी भावनात्मक बोझ भी उठाना है। दास ने कहा कि वे अपनी संस्था के आभारी हैं कि उन्होंने उन्हें घर के पास तैनात किया, जिससे वे अपने बीमार पिता के साथ रह सके और मुश्किल समय में अपनी ज़िम्मेदारियां निभा सके।
‘यह तीसरी और आखिरी यात्रा होगी’
एसएसबी जवान के जीजा सोनू कुमार, जिन्होंने अपनी पत्नी, बेटे और बेटी को खो दिया, ने कहा कि जब उनका परिवार तीर्थयात्रा पर निकला था, तो उन्हें मन में एक गहरी आशंका हुई थी। उनकी पत्नी ने कहा था कि वे पहले भी दो बार मंदिर जा चुकी हैं और यह उनकी तीसरी और आखिरी यात्रा होगी। ये शब्द सच साबित हुए और इसलिए अब बहुत परेशान करते हैं।
उन्हें अपने परिवार के सदस्यों के डेथ सर्टिफिकेट मिल गए हैं, हालांकि उनके शव अभी तक नहीं मिले हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई मुआवज़ा नहीं मिला है। शुरुआत में, हमें यह दर्दनाक उम्मीद थी कि शायद वे ज़िंदा मिल जाएं, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, वह उम्मीद धीरे-धीरे खत्म हो गई।
क्या बोले बीजेपी नेता सुनील शर्मा
वरिष्ठ बीजेपी नेता और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि यह त्रासदी एक कभी न भूलने वाली और बेहद दर्दनाक याद बनी हुई है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि छूट की बार-बार मांग के बावजूद, छह साल के नियम के कारण लापता लोगों के परिवारों को अभी तक मुआवज़ा नहीं मिला है।
शर्मा ने कहा कि नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन और एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से पुनर्वास, पुनर्निर्माण, बहाली और सुरक्षा के काम चल रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि जो लोग अभी भी लापता हैं, उनके परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद और अन्य लाभ दिए जाएं।

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