
उज्जैन , 30 July : पवित्र श्रावण मास की शुरुआत होते ही बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पूरी तरह शिवमय हो गई है. सावन के पावन अवसर पर तड़के से ही देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें बाबा के अलौकिक दर्शनों के लिए लगी रहीं.
श्रावण मास के पहले दिन उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में तड़के 3 बजे अलौकिक भस्मारती का आयोजन हुआ. बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक और भांग-चंदन से मनमोहक श्रृंगार कर भस्म अर्पित की गई, जिसके दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ा.
‘जय महाकाल’ के उद्घोष से गूंजा मंदिर परिसर (Sawan First Day Mahakal)
सावन के पहले दिन तड़के ठीक 3 बजे जैसे ही महाकालेश्वर मंदिर के पट खोले गए, पूरा परिसर ‘हर हर महादेव’ और ‘जय महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा. परंपरा के अनुसार, भस्मारती से पूर्व गर्भगृह में बाबा महाकाल का दूध, दही, घी, शहद और विभिन्न फलों के रसों से भव्य महा पंचामृत अभिषेक किया गया.
भांग, चंदन और मेवों से हुआ अलौकिक श्रृंगार (Mahakal Shringar)
महाकाल मंदिर के पुजारी अर्पित जी के अनुसार, अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का भांग, चंदन और सूखे मेवों से अत्यंत मनमोहक श्रृंगार कर उन्हें दिव्य वस्त्र धारण कराए गए. इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच बाबा को भस्म अर्पित की गई.
भस्मारती के अलौकिक दर्शन से धन्य हुए श्रद्धालु (Mahakal Bhasma Aarti)
सावन मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. भस्मारती का यह पावन अनुष्ठान देखकर उपस्थित हजारों भक्त मंत्रमुग्ध हो गए. श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन में महाकाल के इस रूप के दर्शन करने मात्र से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं.





