Gold Rate , 13 July : अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. साल 2026 की शुरुआत में ऑल-टाइम हाई छूने के बाद अब सोने की कीमतों पर भारी दबाव देखा जा रहा है. वैश्विक और घरेलू बाजार में सोने के दाम अपने पीक से करीब 27 फीसदी तक टूट चुके हैं. बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भारतीय वायदा बाजार में सोने की कीमतों में कम से कम 20 हजार रुपए प्रति दस ग्राम की और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है.
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें अपने ऑल-टाइम हाई ($5,595) से 27% गिरकर मंदी के दौर में आ गई हैं. मिडिल ईस्ट में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत होते डॉलर की वजह से सोने पर दबाव है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भारतीय वायदा बाजार में सोना ₹20,000 और सस्ता होकर ₹1.22 लाख प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है. हालांकि, लॉन्ग टर्म आउटलुक मजबूत है और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी के चलते इस गिरावट को निवेश का अच्छा मौका माना जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेयर मार्केट की एंट्री
जनवरी 2026 में $5,595 प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद ग्लोबल मार्केट में सोना लगातार फिसल रहा है. वर्तमान में यह अपने पीक से 27% गिरकर ‘बेयर मार्केट’ (मंदी के दौर) में प्रवेश कर चुका है. कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें 16% की और गिरावट आ सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम $3,400 से $3,500 प्रति औंस तक नीचे आ सकते हैं.
मिडिल ईस्ट संकट और मजबूत डॉलर का असर
सोने में आई इस हालिया गिरावट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट (खासकर अमेरिका और ईरान) में बढ़ता तनाव है. इस वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिसने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की चिंता और अमेरिकी डॉलर को मजबूत किया है. मजबूत डॉलर के कारण दूसरी करेंसी वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है. सिर्फ फरवरी के आखिर से अब तक इंटरनेशनल मार्केट में सोना 23% टूट चुका है.
भारतीय बाजारों की स्थिति और अनुमान (gold price drop)
घरेलू बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना फिलहाल ₹1,42,445 प्रति दस ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट जारी रही तो भारतीय बाजार में सोना ₹20,000 तक और सस्ता होकर ₹1.22 लाख के स्तर पर आ सकता है. बाजार के जानकारों का कहना है कि यह एक ‘टेक्निकल करेक्शन’ है क्योंकि पिछले दो सालों में सोने के दाम लगभग दोगुने हो चुके थे.
निवेशकों के लिए क्या है सलाह? (how much cheaper will gold get)
शॉर्ट टर्म में कमजोरी के बावजूद लंबी अवधि (लॉन्ग टर्म) के लिए एक्सपर्ट्स सोने को लेकर बेहद पॉजिटिव हैं. ब्रोकर्स और रिसर्च हेड्स का मानना है कि अगले 3 सालों में सोना $7,000 प्रति औंस के टारगेट को छू सकता है. इसलिए, कीमतों में आने वाली हर गिरावट को निवेशकों के लिए खरीदारी के एक बेहतरीन मौके के रूप में देखा जाना चाहिए.
सेंट्रल बैंकों की खरीदारी देगी सपोर्ट (gold market crash 2026)
भले ही ऊंची कीमतों के कारण सेंट्रल बैंकों ने साल 2026 की पहली छमाही में सोने की खरीदारी थोड़ी कम की थी, लेकिन वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के सर्वे के मुताबिक, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अगले 12 महीनों में अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की तैयारी में हैं. संकट के समय सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) के तौर पर सोने की मांग हमेशा बनी रहती है, जो लंबे समय में इसकी कीमतों को दोबारा मजबूती देगी.
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