पश्चिम बंगाल , 21 Aug : पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा को लेकर सशस्त्र सीमा बल (SSB) की तैयारियों का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और जवानों के साथ सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को करीब से देखा. सिलीगुड़ी कॉरिडोर देश के लिए बेहद अहम रणनीतिक इलाका है, इसलिए यहां सीमा सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं मानी जाती.
दौरे के दौरान अमित शाह को SSB की ओर से इस्तेमाल की जा रही कई आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन भी दिखाया गया. इनमें ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, थर्मल इमेजिंग उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी जैसी तकनीकें शामिल रहीं. इनका मकसद सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर ज्यादा तेज और सटीक नजर रखना है.
नेपाल और भूटान से लगी खुली सीमा पर खास निगरानी
SSB की जिम्मेदारी भारत-नेपाल और भारत-भूटान की सीमाओं की सुरक्षा करना है. इन सीमाओं की एक खासियत यह है कि यहां लोगों की आवाजाही और स्थानीय स्तर पर सामाजिक-सांस्कृतिक संपर्क लंबे समय से होता आया है. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त रखने के साथ-साथ दोनों पड़ोसी देशों के साथ बने सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों का भी ध्यान रखना जरूरी है.
सिलीगुड़ी का इलाका इस लिहाज से और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील मार्ग के करीब है. सीमा पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय रहते पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी प्राथमिकता है.
स्मार्ट निगरानी और रियल-टाइम इंटेलिजेंस पर जोर
बैठक और प्रदर्शन के दौरान सीमा सुरक्षा के लिए रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों ने नक्शों और ऑपरेशनल मॉडल के जरिए सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी. आधुनिक निगरानी प्रणालियों की मदद से किसी संभावित खतरे की पहचान पहले करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है.
केंद्र सरकार की सीमा सुरक्षा नीति में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है. ड्रोन और AI आधारित निगरानी जैसे साधनों का इस्तेमाल पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है. सरकार का जोर ऐसी एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें अलग-अलग स्तरों पर मिलने वाली सूचनाओं को तेजी से जोड़कर कार्रवाई की जा सके.





