
New Delhi , 18 Aug : भारतीय रेलवे को देश की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है, जिसमें रोजाना करोड़ों यात्री अपनी जान और समय का भरोसा रखकर सफर करते हैं. लेकिन भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने रेलवे प्रशासन और यात्री सुविधाओं की ऐसी खौफनाक तस्वीर पेश की है, जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे.
बता दें कैग की जांच में पाया गया है कि देश के नामी-गिरामी रेलवे स्टेशनों के वॉटर कूलरों से मिलने वाले पानी में बीमारी फैलाने वाला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मौजूद है. यही नहीं, 89 फीसदी से ज्यादा स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाएं मानकों पर पूरी तरह फेल पाई गई हैं.
512 स्टेशनों के ऑडिट में बड़ा खुलासा(CAG Railway Audit)
CAG ने देशभर के 512 नॉन-सबअर्बन रेलवे स्टेशनों का गहन ऑडिट किया. जांच की रिपोर्ट जो सामने आई, उसने रेल मंत्रालय के दावों की धज्जियां उड़ा दीं. कुल 458 स्टेशनों (यानी 89% से ज्यादा) पर ‘न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं’ की भारी किल्लत पाई गई. इनमें पीने के पानी से लेकर शौचालय, यूरिनल, बैठने के बेंच, प्लेटफॉर्म शेल्टर, पंखे और साइन बोर्ड जैसी सबसे बेसिक जरूरतें गायब थीं.
वॉटर कूलरों में मिला खतरनाक बैक्टीरिया
रिपोर्ट में सबसे डरावना खुलासा पीने के पानी को लेकर हुआ है. देश के आठ बड़े और व्यस्तम रेलवे स्टेशनों के वॉटर कूलर से लिए गए सैंपल्स में ‘E. coli’ बैक्टीरिया पाया गया. इनमें मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), कल्याण, लोनावला, भिवंडी रोड, दक्षिण रेलवे का कोयंबटूर और पालक्काड जंक्शन, साउथ सेंट्रल रेलवे का हैदराबाद और ईस्टर्न रेलवे का मधुपुर स्टेशन शामिल हैं. यानी जिन वॉटर कूलरों से यात्री मुसाफिरी के दौरान प्यास बुझाते हैं, वे असल में बीमारियों का अड्डा बने हुए थे.
नलों के पानी में मिला कोलीफॉर्म
कैग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022-23 में 8 जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में 9 जोन के 56 स्टेशनों के प्लेटफॉर्म नल से लिए गए पानी के सैंपल्स में ‘टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ की पुष्टि हुई. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कई रेलवे ज़ोन में पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच तय सरकारी नियमों और प्रोटोकॉल के हिसाब से की ही नहीं जा रही थी, जिससे यात्रियों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ हो रहा था.
शौचालयों की भी भारी कमी
मामला सिर्फ गंदे पानी तक सीमित नहीं है. आंकड़ों की मानें तो ऑडिट के दौरान 201 स्टेशनों पर शौचालयों की भारी कमी, 403 स्टेशनों पर यूरिनल गायब और 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की घोर किल्लत पाई गई. ऐसे में साफ-सफाई के बड़े-बड़े विज्ञापनों और दावों के बीच यह रिपोर्ट रेलवे के मेंटेनेंस पर बहुत बड़ा धब्बा साबित हो रही है.
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