
कोलंबो, 23 July : श्रीलंका पिछले करीब दस सालों में डेंगू के सबसे बुरे प्रकोप का सामना कर रहा है। ये बीमारी इतने खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है कि सरकार को इससे निपटने के लिए ड्रोन तैनात किए हैं।
मिलिट्री ड्रोन की मदद से छतों और मच्छरों के पनपने वाली जगहों का पता लगाया जा रहा है। जगह-जगह जमा पानी का पता लगाया जा रहा है।
वायरस से 56 लोगों की मौत
डेंगू बुखार, जो मच्छरों के जरिए इंसानों में फैलता है, गर्म और नमी वाले इलाकों (ट्रॉपिकल क्लाइमेट) में आम है, लेकिन दुनियाभर में तापमान बढ़ने के साथ इन मच्छरों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
इस साल श्रीलंका में इस वायरस से 56 लोगों की मौत हुई है और 77,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं, जिनमें से करीब 20 हजार मामले सिर्फ जुलाई में ही सामने आए हैं।
बीमारी फैलाने वाले ये मच्छर अब यूरोप और मेडिटेरेनियन जैसे नए इलाकों में भी फैल रहे हैं। WHO के मुताबिक, दुनिया भर में सामने आए मामलों की संख्या साल 2000 में लगभग पांच लाख से बढ़कर 2024 में 1.44 करोड़ (14.4 मिलियन) हो गई है।
कैसे फैलता है डेंगू?
डेंगू एक वायरल बुखार है जो डेंगू वायरस से होता है और संक्रमित एडीज मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है। ये मच्छर बाल्टी, फूलदान और गमलों की प्लेट जैसे जमा पानी में पनपते हैं।
डेंगू वायरस दिन के समय ज्यादा सक्रिय होता है और आमतौर पर सूरज उगने के ठीक बाद और सूरज डूबने के आसपास काटते हैं।
डेंगू से संक्रमित कई लोगों में लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जिन लोगों में लक्षण दिखते हैं, उनमें तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना और शरीर पर चकत्ते पड़ना शामिल है। ये लक्षण आमतौर पर एक या दो हफ्ते में ठीक हो जाते हैं।







