
जम्मू, 8 June : उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि नार्को-टेरर नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है। नई एसओपी के तहत नशा तस्करी में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनके पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, हथियार लाइसेंस और आधार कार्ड रद्द किए जाएंगे तथा एनडीपीएस अधिनियम के तहत उनकी चल-अचल संपत्तियां जब्त की जाएंगी।
पूंछ में रविवार को आयोजित नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान और पदयात्रा में भाग लेने के दौरान उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा केंद्र शासित प्रदेश के सभी 20 जिलों तक पहुंच चुकी है और इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की धरती को नशे के अभिशाप से मुक्त कराना तथा नार्को-टेररिज्म का पूरी तरह सफाया करना है।
उपराज्यपाल ने कहा कि पूंछ से नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर की लड़ाई को और तेज किया जा रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि अगले 43 दिनों तक प्रत्येक नागरिक, पंचायत और वार्ड नशा तस्करों के खिलाफ एकजुट होकर जागरूकता फैलाए तथा पुनर्वास प्रयासों को गति दे। सामूहिक जिम्मेदारी ही एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का निर्माण करेगी।
उन्होंने कहा कि पिछले 57 दिनों के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक जिले का दौरा किया और लोगों से वादा किया था कि समाज को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार प्रदेश के युवाओं के लिए उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एक व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा
उपराज्यपाल ने कहा कि अगले 43 दिनों में पूंछ सहित पूरे जम्मू-कश्मीर में एक व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा, जिसका लक्ष्य प्रत्येक पंचायत, गली और घर को नशा मुक्त बनाना होगा।उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिला होने के कारण पूंछ में नार्को-आतंकी तत्व भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी जहां युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है, वहीं आतंकवाद को भी वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इससे निपटने के लिए पूरे समाज को मिलकर काम करना होगा।
मनोज सिन्हा ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में उदासीनता की जगह सक्रिय भागीदारी जरूरी है। यह मेरी समस्या नहीं है जैसी सोच नशा तस्करों और ड्रग पेडलरों को बढ़ावा देती है क्योंकि वे लोगों की चुप्पी का लाभ उठाकर अपना नेटवर्क फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक बदलाव तब आता है जब समुदाय एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करता है। आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सतर्क नागरिक भी समृद्ध समाज की आधारशिला हैं। पिछले 57 दिनों के अभियान के दौरान जम्मू-कश्मीर में नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई है।
अब तक 1,038 एफआइआर दर्ज
उपराज्यपाल ने बताया कि अब तक 1,038 एफआइआर दर्ज कर 1,130 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 63 लोगों को एनडीपीएस के तहत हिरासत में लिया गया है। 100 से अधिक संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अतिरिक्त 700 ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किए गए हैं तथा 130 पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि ड्रग-फ्री जम्मू-कश्मीर अभियान को प्रत्येक घर तक पहुंचाना होगा और इसे जनचेतना का स्थायी हिस्सा बनाना होगा। युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और खेल गतिविधियों से जोड़कर उन्हें नशे के खिलाफ सबसे मजबूत शक्ति बनाया जा सकता है। उपराज्यपाल ने बताया कि अभियान की रणनीति दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला, युवा क्लबों को स्थानीय नशा नेटवर्क के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर तैनात करना और दूसरा, महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका देकर माताओं और बहनों को प्रत्येक गांव को नशा मुक्त बनाने के अभियान से जोड़ना।
अपने संबोधन के अंत में उपराज्यपाल ने कहा कि जनभागीदारी से ही नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर का निर्माण होगा। पुलिस, कानून प्रवर्तन एजेंसियां और नारकोटिक्स विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके अधिकार क्षेत्र में कोई भी नशा तस्कर या ड्रग पेडलर सक्रिय न रह सके। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी जरूर है, लेकिन तब तक जारी रहेगी जब तक नार्को-टेरर के पूरे नेटवर्क का सफाया नहीं हो जाता।

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