
IIT Bombay Biomass Gasification , 31 Mar : पूरी दुनिया में जब रसोई गैस और ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ रखा है, ऐसे में मुंबई के IIT बॉम्बे से एक ऐसी खबर आई है जो न सिर्फ जेब को राहत देगी, बल्कि पर्यावरण के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है.
IIT बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी कमाल की तकनीक ईजाद की है, जो कैंपस में पड़े रहने वाले सूखे पत्तों और कचरे को सीधे खाना पकाने वाले ईंधन में बदल रही है. यानी जिन पत्तों को हम झाड़ू लगाकर फेंक देते थे, अब वही चूल्हा जलाने के काम आ रहे हैं.
12 साल में नाकामियों से मिली सीख
इस सफर की कहानी आज की नहीं, बल्कि साल 2014 में शुरू हुई थी. प्रोफेसर संजय महाजनी ने जब ‘बायोमास गैसीफिकेशन’ पर काम शुरू किया, तो उनका मकसद साफ था कैंपस के जैविक कचरे का सही निपटारा. लेकिन राह इतनी आसान नहीं थी.
शुरुआती ट्रायल के दौरान मशीन अक्सर जाम हो जाया करती थी क्योंकि भारतीय बायोमास से ‘क्लिंकर’ (एक तरह का ठोस कचरा) बन जाता था. हद तो तब हो गई जब टेस्टिंग के दौरान किचन में इतना धुआं भर गया कि 30 मिनट तक सांस लेना दूभर हो गया. कई लोगों को लगा कि यह आइडिया फ्लॉप हो जाएगा, लेकिन टीम डटी रही.
2016 में मिला पेटेंट
दो साल की कड़ी मशक्कत के बाद 2016 में एक ऐसा गैसीफायर तैयार किया गया जिसने क्लिंकर की समस्या को लगभग खत्म कर दिया. इस आविष्कार की अहमियत को देखते हुए इसे पेटेंट भी मिल गया. इसके बाद 2017 में संदीप कुमार टीम का हिस्सा बने और उन्होंने एक खास तरह का ‘बर्नर’ डिजाइन किया, जिससे आग की लपटें एलपीजी जैसी ही तेज और साफ निकलने लगीं. पूरे एक साल तक कैंपस के रसोइयों को ट्रेनिंग दी गई और सुरक्षा की बारीकी से जांच की गई.
बचत के साथ प्रदूषण से आजादी
नतीजा आज सबके सामने है. IIT बॉम्बे की स्टाफ कैंटीन में अब इसी तकनीक से खाना बन रहा है. इससे सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की खपत में 30 से 40 फीसदी तक की गिरावट आई है. यह सिस्टम न केवल 60% की हाई एफिशिएंसी के साथ काम करता है, बल्कि हर साल करीब 8 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को भी कम कर रहा है.
अब इस तकनीक का लाइसेंस एक निजी कंपनी को दे दिया गया है, ताकि इसे बड़े स्तर पर होटलों और कम्युनिटी किचन में पहुंचाया जा सके. उम्मीद है कि आने वाले समय में यह ‘कचरे से कंचन’ बनाने वाली तकनीक भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी.
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