
Trade desk, 30 Mar : सोमवार के कारोबारी सत्र में भारतीय करेंसी रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के स्तर को पार कर गया, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई है। यह अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है, जो वैश्विक आर्थिक दबाव और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपए पर भारी दबाव डाला है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता ने भी रुपए की गिरावट को तेज किया है। मजबूत डॉलर इंडेक्स भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना रहा है।
शुरूआती कारोबार में आई थी मजबूती
हालांकि रुपए ने बढ़त के साथ शुरूआत की लेकिन बाद में इसने शुरुआती लाभ गंवा दिया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर खुला और फिर 93.57 प्रति डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले बंद स्तर से 128 पैसे की बढ़त दर्शाता है। यह बढ़त हालांकि बरकरार नहीं रह सकी और रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले दिन के कारोबार में 95.22 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 89 पैसे की भारी गिरावट के साथ 94.85 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।






