
बरामुल्ला , 20 Jan : कश्मीर के कुशल कारीगरों की बेमिसाल प्रतिभा का जीवंत उदाहरण दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हस्तनिर्मित रेशमी कालीन इन दिनों बारामुल्ला जिले के कुन्जर क्षेत्र के कार्लपोरा गांव में अपने अंतिम चरण में है। 30×72 फीट आकार का यह भव्य कालीन 15 कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया जा रहा है और इस वर्ष के अंत तक विदेश निर्यात किए जाने की संभावना है।
यह कालीन व्यवसायी फैज अहमद शाह के विशेष ऑर्डर पर बनाया जा रहा है, जिस पर पिछले 9 वर्षों से काम चल रहा है। मास्टर बुनकर अब्दुल गफ्फार शेख अपनी टीम के साथ प्रतिदिन लगभग 10 घंटे मेहनत कर रहे हैं। काशगर में तैयार किए गए विशेष रेशमी धागों से बना यह कालीन लगभग 12 क्विंटल वजनी होगा और इसमें करीब 25 करोड़ गांठें (नॉट्स) होंगी। इसकी कुल उत्पादन लागत लगभग 6 करोड़ रुपये आंकी गई है।
हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशक कश्मीर, मस्रत इस्लाम ने कहा कि यह कालीन कश्मीरी कारीगरों की असाधारण कला का प्रतीक है और वैश्विक हस्तशिल्प बाजार में कश्मीर की पहचान को और मजबूत करेगा। उन्होंने बताया कि इसमें प्रयुक्त रेशम का चयन इस तरह किया गया है कि समय के साथ इसकी चमक और मजबूती और बढ़े। इस कालीन का निर्माण कश्मीर के हस्तशिल्प उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो क्षेत्र की पारंपरिक शिल्पकला में दक्षता को उजागर करता है। पूर्ण होने के बाद यह कालीन कश्मीरी कारीगरों की लगन और मेहनत का प्रमाण बनेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान व सराहना प्राप्त करने की उम्मीद है।







