
18, Dec : लोकसभा में ‘विकसित भारत: गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ यानी ‘वीबी-जी राम जी’ बिल पास हो गया है. चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ. विपक्षी सांसदों ने बिल का विरोध करते हुए नारेबाजी की और कागज फेंके. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि मनरेगा का नाम पहले महात्मा गांधी के नाम पर नहीं रखा गया था, यह 2009 के चुनावों के बाद जोड़ा गया था.
विपक्ष की मांग- JPC को भेजो
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने बिल को स्थायी समिति या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने की मांग की, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसे खारिज कर दिया. विपक्ष का आरोप है कि बिल मनरेगा की मांग आधारित गारंटी को कमजोर करता है और महात्मा गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमान है.
बिल के क्या हैं प्रावधान?
बिल के तहत हर साल 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा, जो मौजूदा मनरेगा के 100 दिनों से अधिक है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह बिल ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत करेगा और विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ा हुआ है.
विपक्ष ने बताया विरोध का कारण
विपक्ष ने बिल के विरोध में संसद परिसर में मार्च निकाला, जिसमें 50 से ज्यादा सांसदों ने हिस्सा लिया. विपक्ष का आरोप है कि बिल राज्यों पर वित्तीय बोझ डालता है और मनरेगा के प्रावधानों को कमजोर करता है.
शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर
देशभर में 10.13 लाख सरकारी स्कूलों में से 5,149 में एक भी छात्र नहीं है. यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय ने संसद में दी है. शून्य नामांकन वाले इन स्कूलों में से 70% से ज्यादा तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में हैं. तेलंगाना में 2081 और पश्चिम बंगाल में 1571 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं हैं. शून्य या 10 से कम छात्रों वाले स्कूलों की संख्या में बीते दो साल में 24% की बढ़ोतरी हुई है. 2022-23 में ऐसे स्कूलों की संख्या 52,309 थी, जो 2024-25 में बढ़कर 65,054 हो गई है। इन स्कूलों में 1.44 लाख शिक्षक तैनात हैं.





