यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भारत का डिफेंस सेक्टर टकटकी निगाहों से देख रहा है. आज भारत और रूस के बीच 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात होने वाली है. दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि रक्षा क्षेत्र के लिए संजीवनी की तरह है. आज भारत और रूस के बीच हथियार, मिसाइलें, एयर डिफेंस सिस्टम से लेकर फाइटर जेट्स पर बड़ा सौदा होने की उम्मीद है.
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के इस सम्मेलन को लेकर डिफेंस सेक्टर में गजब का उत्साह दिख रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक आज भारत और रूस के बीच SU-57 फाइटर जेट, S-500 एयर डिफेंस सिस्टम, ब्रह्मोस और Su-30 के अपग्रेडेशन पर बड़ा ऐलान संभव है.
इन क्षेत्रों में बन सकती है बात
व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुंचे. जहां पीएम मोदी खुद पहुंचकर उनका स्वागत किया. पुतिन 4 सालों बाद भारत की यात्रा पर आए हुए हैं. आखिरी बार उन्होंने 2021 में भारत का दौरा किया था. पुतिन का इस दौरे पर मुख्य फोकस रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर रहने वाला है. रूस जहां भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है.
भारत के 36 फीसदी हथियार रूसी
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत ने 2024 में 36 फीसदी हथियार रूस से खरीदे थे. वहीं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूसी S-400 सिस्टम ने पाकिस्तान के ड्रोन्स और मिसाइलों को गजब हिट किया था. रिपोर्ट के मुताबिक S-400 ने अपने 95 फीसदी टारगेट को हिट करने में सफल रहा. जिसके बाद से भारत इस क्षेत्र में रूस के साथ आगे बढ़ने को बेकरार है. कयास लगाये जा रहे हैं कि S-500 पर भी बात हो सकती है.
अमेरिका की भी रहेगी नजर
रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे पर अमेरिका की भी नजर है. अमेरिका ने भारत पर CAATSA सैंक्शंस लगाने की चेतावनी दी है. जिसका भारत ने करारा जवाब दिया. भारत ने कहा है कि वह अपनी जरूरतें और फैसले खुद तय करेगा ना कि कोई दूसरा देश. भारत के इस रुख पर पुतिन भी खुश नजर आए. उन्होंने कहा है कि मोदी ने अमेरिकी दबाव को नहीं माना. दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी बातचीत होगी. भारत को रूस सस्ता तेल सप्लाई करेगा.
पुरानी दोस्ती को नया कलेवर
पुतिन और मोदी की यह मुलाकात दो पुराने दोस्तों के बीच मजबूत साझेदारी का नया अध्याय लिखने जैसा है. जो भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगा. यह सिर्फ हथियारों का सौदा नहीं है बल्कि दक्षिए एशिया में सैन्य संतुलन की दिशा में एक बड़ा और मजबूत कदम है.





