
Putin India Visit , 4 Dec : गुरुवार शाम को रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत पहुंचेंगे. दो दिनों की इस यात्रा में वे पीएम मोदी मुलाकात करेंगे और कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर भी करेंगे. उनके साथ रूसी मंत्रियों का बड़ा दल भी होगा. खास बात यह है कि इस दौरे में बिजनेस टाइकूंस भी शामिल होंगे जिनमें रोसनेफ्ट कंपनी के हेड इगोर सेचिन भी होंगे. रोसनेफ्ट का रिलायंस इंडस्ट्रीज और मुकेश अंबानी से गहरा रिश्ता है.
रोसनेफ्ट और अंबानी का रिश्ता
रोसनेफ्ट रूस की सबसे बड़ी सरकारी तेल की कंपनी है. इसके ऑयल को रिफाइन कर मुकेश अंबानी ने यूरोप तक पेट्रोल-डीजल सप्लाई किया. कोविड और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी रिलायंस ने भारत के एक्सपर्ट को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रोसनेफ्ट पर बैन लगा दिया है जिससे रिलायंस और भारत के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं.
रिलायंस की 10 साल की डील
रिलायंस इंडस्ट्रीज (जो गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है) ने 2024 में रोसनेफ्ट के साथ 10 साल का समझौता किया था. इस डील के तहत रिलायंस ने लगभग 5 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदने का करार किया. कुछ हफ्ते पहले तक भारत को भेजे जाने वाले 1.7-1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन रियायती रूसी तेल का आधा हिस्सा रिलायंस ही खरीद रही थी.
सबसे बड़ी एनर्जी डील
रोसनेफ्ट और रिलायंस के बीच हुई यह डील अब तक की सबसे बड़ी एनर्जी डील मानी जाती है. वैल्यू की बात करें तो सालाना 13 बिलियन डॉलर से ज्यादा है. पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल सस्ता हो गया था और भारत ने इसका फायदा उठाया. पहले भारत के ऑयल बास्केट में रूसी तेल की हिस्सेदारी बेहद कम थी लेकिन अब यह 40 फीसदी से ऊपर पहुंच गई है.
कंपनी पर ट्रंप का बैन
डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि भारत रूस की वॉर मशीन को फ्यूल दे रहा है. इसी वजह से उन्होंने भारत पर रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया और रोसनेफ्ट पर बैन भी लगा दिया. इसके चलते रिलायंस समेत कई भारतीय रिफाइनरियों को अपना आयात कम करना पड़ा.
पुतिन और मोदी की मुलाकात पर नजर
तेल के मोर्चे पर रूस भारत का एक अहम पार्टनर बन चुका है. रूस नहीं चाहेगा कि ट्रंप के बैन की वजह से उसका सबसे बड़ा ऑयल क्लाइंट हाथ से निकल जाए. यही कारण है कि रोसनेफ्ट के अधिकारी भी पुतिन के साथ भारत आ रहे हैं. मास्को चाहता है कि भारत, जो उसका प्रमुख समुद्री तेल ग्राहक है, खरीदारी जारी रखे.
भारत का तेल आयात घटा
इस महीने भारत का कच्चा तेल आयात तीन साल के निचले स्तर पर पहुंचने वाला है क्योंकि अमेरिका ने रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं. इंडियन ऑयल गैर-प्रतिबंधित कंपनियों से तेल खरीद रहा है जबकि भारत पेट्रोलियम ऑर्डर के लिए बातचीत कर रहा है. रिलायंस ने भी कहा है कि वह 22 नवंबर के बाद आने वाले रूसी तेल को अपने घरेलू प्लांट में प्रोसेस करेगा.





