
Delhi , 9 Oct : दिल्ली विधानसभा का ऐतिहासिक सदन शुक्रवार को नन्हे पर्यावरण प्रहरियों की गंभीर और तथ्यपरक आवाजों से गूंज उठा. पर्यावरण संरक्षण गतिविधि (PSG) द्वारा आयोजित और मानव रचना शैक्षिक संस्थान की राष्ट्रीय मेज़बानी में ‘राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद 2026’ का सफल आयोजन हुआ. इस दौरान कक्षा आठवीं से बारहवीं तक के मेधावी विद्यार्थी विधायकों की कुर्सियों पर आसीन हुए और सदन को प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और सतत विकास पर केंद्रित जीवंत संवाद के राष्ट्रीय मंच में बदल दिया.
कार्यक्रम का मुख्य केंद्रीय विषय (थीम) “जागरूकता से कर्म तक: आज बोएँगे, कल उगाएँगे” रखा गया था. इस अनूठी पहल के माध्यम से पर्यावरण शिक्षा को केवल स्कूली पाठ्यक्रमों और कक्षाओं की चारदीवारी से बाहर निकालकर लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर तक पहुंचाया गया, जिससे विद्यार्थियों को संसदीय प्रक्रिया, लोकतांत्रिक मर्यादा और नीतिगत मसौदा तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने की अनुशासित आचरण की सराहना
समारोह में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल जी आर्य सहित कई जनप्रतिनिधि और पर्यावरणविद उपस्थित रहे. प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विद्यार्थियों के शोध, तथ्यपरक तर्कों और अनुशासित संसदीय आचरण की भूरि-भूरि प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि विधानसभा स्वस्थ संवाद और तर्कसंगत विमर्श का मंच है, जहां अपने विचार रखने के साथ-साथ विरोधी विचारों को धैर्यपूर्वक सुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने छात्रों से निरंतर जिज्ञासु रहने और अपनी ऊर्जा को स्वच्छ पर्यावरण व राष्ट्र निर्माण में लगाने का आह्वान किया.
पंचमहाभूत, दैनिक जीवनशैली में बदलाव का संदेश
पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल जी आर्य ने भारतीय चिंतन के ‘पंचमहाभूत’—पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश—का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों, अभियानों या नीतिगत बहसों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे व्यक्ति के दैनिक आचरण में उतरना होगा. उन्होंने बच्चों को समुद्र को बूंद-बूंद खाली करने वाली नन्हीं चिड़िया का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए व्यक्तिगत पहल करने की सीख दी.
श्री आर्य ने बच्चों को अपने-अपने घरों का ‘पर्यावरणीय आत्म-अंकेक्षण’ करने का सुझाव दिया. इसके तहत बिजली की अनावश्यक खपत घटाना, गीले कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, सिंगल-यूज प्लास्टिक का त्याग, दैनिक जीवन में जल की बचत और रीसायकल्ड कागज का उपयोग जैसे सरल और व्यावहारिक संकल्प अपनाने पर जोर दिया गया.
सात श्रेणियों में सम्मानित हुए बाल सांसद
विमर्श के दौरान छात्रों ने संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्रों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग), टिकाऊ शहरी परिवहन और रिन्यूएबल एनर्जी पर केवल समस्याएं ही नहीं गिनाईं, बल्कि शोध पर आधारित समाधान भी पेश किए. कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सात श्रेणियों में सम्मानित किया गया:
- हरित नवांकुर
- बाल संसद चेंजमेकर
- सर्वश्रेष्ठ वक्ता
- सर्वश्रेष्ठ सांसद
- बाल शोधकर्ता
- सर्वश्रेष्ठ पत्रकार
- बाल संसद आइकन
दिन का मुख्य संदेश यही रहा कि पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक शुरुआत व्यक्तिगत जागरूकता से होती है और उसे वास्तविक सार्थकता दैनिक कर्म से मिलती है.







