
श्रीनगर, 8 July : मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में समुद्र तल से करीब 9000 फीट की ऊंचाई पर स्थित बालटाल बेस कैंप इन दिनों भक्ति और दृढ़ संकल्प का गवाह बन रहा है।
हिमालय की ठंडी हवाओं और पथरीली पगडंडियों के बीच 70 से 72 साल के बुजुर्ग श्रद्धालु श्री अमरनाथ यात्रा के सबसे प्रेरणादायक चेहरे बनकर उभरे हैं। छड़ी के सहारे, ऊनी कपड़ों में लिपटे और परिजनों या स्वयंसेवकों का हाथ थामे ये यात्री साबित कर रहे हैं कि आस्था के आगे उम्र, दर्द और शारीरिक सीमाएं बौनी हैं।
राजस्थान के 70 वर्षीय महंत देव के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन दशकों पुराना सपना था। बालटाल मार्ग पर सांस संभालते हुए उन्होंने कहा, ‘मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है और परिवार चिंतित था, लेकिन मैंने कहा कि आस्था वह शक्ति देती है जो दवाइयां नहीं दे सकतीं। बाबा खुद चलने का साहस देते हैं।’
घुटने के ऑपरेशन के बाद भी नहीं रुके कदम
पंजाब के 70 वर्षीय इकबाल सिंह ने बताया कि पिछले साल घुटने का ऑपरेशन हुआ था। डॉक्टर ने कठिन यात्रा से मना किया, लेकिन बाबा बर्फानी से किया वादा निभाने वे पहुंच गए। ‘जब मंदिर से बुलावा आता है तो कोई रोक नहीं सकता। मैं भी नहीं रुका,’ उन्होंने माला जपते हुए कहा।
पति की यादों के साथ पहुंचीं शांति देवी
महाराष्ट्र की 70 वर्षीय शांति देवी के लिए यह यात्रा बेहद भावुक है। तीन साल पहले पति को खोने के बाद वे उनका साझा सपना पूरा करने आई हैं। ‘उनकी यादों और प्रार्थनाओं को साथ लेकर आई हूं। इन पहाड़ों में आत्मा को शांति मिलती है,’ नम आंखों से उन्होंने बताया।
हर कदम पर गूंज रहा ‘हर हर महादेव’
उत्तर प्रदेश की 69 वर्षीय देविका थकान के बावजूद मुस्कुराती दिखीं। बेटे के कंधे पर सिर टिकाकर बोलीं, ‘उम्र के साथ शरीर कमजोर होता है, लेकिन भक्ति कभी कमजोर नहीं पड़ती। ‘हर हर महादेव’ का जाप करते ही दर्द भूल जाते हैं।’ गुजरात के 72 वर्षीय जेवंत पटेल ने कहा, ‘यह यात्रा धैर्य और समर्पण सिखाती है। हर मुश्किल कदम एक प्रार्थना जैसा है।’
सीआरपीएफ जवान बने सहारा
सीआरपीएफ श्रीनगर नार्थ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल और बालटाल बेस कैंप के नोडल अधिकारी ने बुजुर्ग यात्रियों के जज्बे को सराहा। उन्होंने कहा, ‘शारीरिक चुनौतियों के बावजूद बुजुर्ग अटूट आस्था के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारे जवान कठिन रास्तों पर उनकी मदद कर रहे हैं।’ मेडिकल टीमें, इमरजेंसी रिस्पॉन्स यूनिट और सपोर्ट स्टाफ चौबीसों घंटे मौजूद हैं। टट्टू, पालकी या पैदल चल रहे बुजुर्गों की यात्रा सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।






