उत्तर प्रदेश , 17 Sep : उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कह दिया है और समाजवादी पार्टी का हाथ थाम लिया है. लंबे समय बाद उनकी सपा में वापसी ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.
बसपा से शुरू हुआ सफर
कानपुर के रहने वाले कुशवाहा ने अपना राजनीतिक करियर बहुजन समाज पार्टी से शुरू किया था. साल 1996 में वह बसपा के टिकट पर विधायक बने और यहीं से उनकी पहचान बनी. इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख किया और संगठन में अहम जिम्मेदारी संभाली.
मुलायम सिंह के करीबी रह चुके हैं कुशवाहा
सपा में रहते हुए कुशवाहा को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया. उस दौर में उन्हें मुलायम सिंह यादव का भरोसेमंद माना जाता था. संगठन और सरकार दोनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही. ओबीसी समुदाय से आने के कारण उनकी पकड़ भी मजबूत रही.
साल 2013 का क्या है विवाद?
साल 2013 में जब वह सपा के राष्ट्रीय महासचिव थे, तब मुजफ्फरनगर दंगों पर उनके अलग रुख ने पार्टी में विवाद खड़ा कर दिया. नतीजा यह हुआ कि उन्हें पद से हटाया गया और बाद में पार्टी से भी बाहर कर दिया गया. उस समय यह मामला काफी सुर्खियों में रहा.
BJP का सफर और अब वापसी
सपा छोड़ने के बाद कुशवाहा ने बीजेपी का दामन थामा. लेकिन अब उन्होंने फिर से समाजवादी पार्टी में लौटने का फैसला किया है. करीब 13 साल बाद उनकी घर वापसी ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है.
चुनावी माहौल में अहम कदम
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उनकी सपा में वापसी को खास नजरिए से देखा जा रहा है. ओबीसी नेता होने के कारण उनका जुड़ना पार्टी के लिए रणनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है. हालांकि इसका असर चुनावी नतीजों पर कितना होगा, यह समय बताएगा.
पुराने पते पर लौटे कुशवाहा
राम आसरे कुशवाहा का राजनीतिक सफर एक बार फिर उसी पार्टी तक पहुंच गया है, जहां से उन्होंने बड़ा नाम कमाया था. कभी सपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे कुशवाहा अब दोबारा उसी मंच पर सक्रिय दिखाई देंगे.
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