Bangladesh, 25 Aug : बांग्लादेश में सियासी उठापटक के बाद अब आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े संकट के बादल मंडराने लगे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से ही देश की अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है, लेकिन अब वहां का उद्योग जगत एक ऐसी दोहरी मार झेल रहा है जिससे उसकी कमर टूटती नजर आ रही है. एक तरफ घटते विदेशी ऑर्डर और भारी कर्ज का बोझ है, तो दूसरी तरफ बिजली और गैस की भयंकर किल्लत ने फैक्ट्रियों के पहिए रोक दिए हैं.
सैकड़ों फैक्ट्रियों पर लगा ताला
आंकड़ों पर नजर डालें तो हालात वाकई डरावने हैं. अगस्त 2024 से लेकर जून 2026 के बीच बांग्लादेश के सात बड़े औद्योगिक इलाकों में कम से कम 457 फैक्ट्रियों को हमेशा के लिए बंद करना पड़ा है. इनमें गारमेंट और टेक्सटाइल मिलों के अलावा स्टील, सिरेमिक और फार्मास्यूटिकल जैसी अन्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स भी शामिल हैं.
फैक्ट्रियों के बंद होने का सीधा और सबसे बुरा असर वहां के आम मजदूरों पर पड़ा है. सिर्फ इस साल जनवरी से अगस्त के बीच गाजीपुर, सावर और नारायणगंज जैसे प्रमुख इंडस्ट्रियल जोन में लगभग 95 फैक्ट्रियां बंद होने से 61,000 से ज्यादा लोगों के रोजगार छिन चुके हैं. अकेले गाजीपुर में ही 45 हजार से ज्यादा नौकरियां जाने से मजदूरों के परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
गैस और ऊर्जा के संकट ने बढ़ाई मुसीबत
इस वक्त बांग्लादेश के उद्योगों के सामने सबसे बड़ा रोड़ा गैस की भारी कमी बन गया है. जुलाई के दौरान एक प्रमुख एलएनजी (LNG) टर्मिनल के बंद होने से रोजाना मिलने वाली गैस की सप्लाई में भारी गिरावट आई है. स्थिति इतनी खराब है कि ढाका और उसके आसपास की एक हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां लगभग ठप पड़ी हैं.
हबीगंज का हाल तो ऐसा है कि वहां 171 फैक्ट्रियों की गैस सप्लाई पूरी तरह रोक दी गई, जिसके चलते डेढ़ लाख से ज्यादा कर्मचारी बिना काम के बैठने को मजबूर हो गए हैं. गैस न मिलने की वजह से फैक्ट्री मालिक अब मजबूरी में महंगे डीजल या यहां तक कि बॉयलर चलाने के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत आसमान छू रही है.
अर्थव्यवस्था के सामने वजूद बचाने की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट रातों-रात पैदा नहीं हुआ है, बल्कि पुराने गैस क्षेत्रों में उत्पादन घटने और ऊर्जा की मांग बढ़ने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती गई है. उद्योग जगत से जुड़े जानकारों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते गैस और बिजली की सप्लाई को पटरी पर नहीं लाया गया, तो विदेशी खरीदार दूसरे देशों का रुख कर लेंगे, जिससे बांग्लादेश के गारमेंट एक्सपोर्ट मॉडल को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
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