
नई दिल्ली, 13 July : भारत का सुखोई Su-30MKI और चीन का J-16 आज भले ही दो अलग-अलग देशों के झंडे तले उड़ान भर रहे हों, लेकिन इन दोनों की जड़ें एक ही सोवियत संघ रूस के ‘फ्लैंकर’ परिवार से जुड़ी हैं।
घातक Su-27 विमान की तकनीक से निकले ये दोनों भारी-भरकम लड़ाकू विमान आज भारतीय वायुसेना (IAF) और चीनी वायुसेना (PLAAF) की रीढ़ की हड्डी हैं। हालांकि इस बात में भी कोई दोहराई नहीं है कि दिखने में एक जैसे लगने के बावजूद, बीते कुछ दशकों के अपग्रेड्स ने इन दोनों लड़ाकू विमानों को अंदर से पूरी तरह बदल दिया है।
तकनीक की मदद से कैसे मिली नई पहचान
इस बात को ऐसे समझिए कि 1990 के दशक के आखिर में चीन ने रूस से Su-30MKK विमान खरीदा था। चीन ने इसके बाहरी ढांचे को तो वैसे ही रखा, लेकिन इसके अंदर की पूरी तकनीक को बदल दिया। चीन ने इसमें अपनी खुद की स्वदेशी रडार, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और मिसाइलें लगा दीं। आज चीन के पास ऐसे 300 से ज्यादा विमान सेवा में हैं।
अब बात भारत के Su-30MKI की
भारत ने चीन की तरह नया विमान बनाने के बजाय रूसी ढांचे के साथ दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीकों का कॉम्बिनेशन तैयार किया। भारत के सुखोई में रूस के ढांचे के साथ फ्रांस का नेविगेशन सिस्टम, इजरायल के इलेक्ट्रॉनिक्स और भारत के अपने स्वदेशी हथियार लगाए गए हैं। भारत के पास ऐसे 260 से ज्यादा विमान हैं।
आमने-सामने की टक्कर-किसमें क्या है खास?
भारत के सुखोई के पास सबसे बड़ा फायदा है। इसमें आगे की तरफ छोटे पंख और ‘थ्रस्ट-वेक्टरिंग’ इंजन लगे हैं, जो इसके धुएं के रुख को मोड़ सकते हैं। इसकी वजह से यह विमान हवा में ऐसी कलाबाजियां खा सकता है जो चीन का विमान सोच भी नहीं सकता। आसान भाषा में समझिए तो सुखोई नजदीकी लड़ाई में यह बहुत घातक है।

दूसरी ओर अब बात अगर चीन के J-16 की करें तो चीन के इस विमान में न तो आगे छोटे पंख हैं और न ही इसका इंजन हवा में मुड़ सकता है। हालांकि, इसे भारी वजन और ज्यादा हथियार उठाने के लिए बेहतर बनाया गया है।
अब रडार को लेकर भी अहम बातें समझिए
बता दें कि सुखोई में में फिलहाल ‘PESA’ रडार लगा है। यह एक साथ कई ठिकानों पर नजर तो रख सकता है, लेकिन यह तकनीक थोड़ी पुरानी हो चुकी है। हालांकि, भारत जल्द ही ‘सुपर सुखोई’ प्रोजेक्ट के तहत इसमें बेहद आधुनिक स्वदेशी ‘AESA’ रडार लगाने जा रहा है।
दूसरी ओर चीन का J-16 विमान इस मामले में अभी आगे है। इसमें पहले से ही ‘AESA’ रडार लगा हुआ है, जिसे आसानी से जाम नहीं किया जा सकता और यह बहुत लंबी दूरी तक दुश्मन को देख सकता है।
दुश्मन के रडार को चकमा देने में कौन कितना आगे?
भारत के Su-30MKI में रूस और इजरायल के मिले-जुले सिस्टम का इस्तेमाल करता है, जो काफी भरोसेमंद हैं। वहीं चीन के J-16 को शुरुआत से ही आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के हिसाब से ढाला है। चीन ने इसका एक खास वर्जन (J-16D) भी बनाया है, जिसका काम सिर्फ दुश्मन के रडार और संचार को ठप करना है।

हथियार और मिसाइलों के बारे में भी जानिए
भारत का सुखोई बेहद खतरनाक ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ले जा सकता है, जो दुनिया के किसी भी कोने में तबाही मचा सकती है। इसके अलावा इसमें भारत की स्वदेशी ‘अस्त्रा’मिसाइल भी लगी है। वहीं चीन का यह विमान पीएल-15 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल से लैस है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल बिना दिखे बहुत दूर से ही निशाना लगाने में माहिर है।
जानिए किस मामले में कौन सा फाइटर जेट है असली सिकंदर
| खूबी | भारत का Su-30MKI | चीन का J-16 | विजेता और मुख्य अंतर |
| फुर्ती और कलाबाजी | कैनार्ड्स और थ्रस्ट-वेक्टरिंग इंजन के कारण हवा में अद्भुत और बेजोड़ पैंतरेबाजी दिखाने में सक्षम है। | इसमें न तो आगे छोटे पंख (कैनार्ड्स) हैं और न ही इसका इंजन घूम सकता है, इसकी फुर्ती सामान्य है। | भारत (Su-30MKI)- करीबी लड़ाई में भारत का पलड़ा भारी है। |
| रडार तकनीक | फिलहाल इसमें PESA रडार लगा है, जिसे ‘सुपर सुखोई’ प्रोजेक्ट के तहत जल्द ही आधुनिक AESA रडार में बदला जाएगा। | यह विमान पहले से ही अत्याधुनिक और स्वदेशी AESA रडार तकनीक से लैस है। | चीन (J-16)- रडार की आधुनिकता और जैमिंग से बचने के मामले में फिलहाल चीन आगे है। |
| सबसे घातक हथियार | यह विमान दुनिया की सबसे खतरनाक ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और स्वदेशी ‘अस्त्रा’ मिसाइल से लैस है। | यह चीन की लंबी दूरी की आधुनिक PL-15 और कम दूरी की PL-10 मिसाइलों से लैस है। | दोनों: हथियारों की मारक क्षमता के मामले में दोनों ही विमान बेहद घातक हैं। |
| कुल संख्या | भारतीय वायुसेना के बेड़े में इसकी कुल संख्या 260 से ज्यादा है और यह वायुसेना की रीढ़ है। | चीनी वायुसेना (PLAAF) में इसकी संख्या 300 से अधिक है और यह मुख्य स्ट्राइक फाइटर है। | चीन (J-16): बेड़े में विमानों की कुल तादाद के मामले में संख्या बल चीन के पास ज्यादा है। |
सामने आए, तो कौन जीतेगा युद्ध?
मुख्य रूप से यह यह इस बात पर निर्भर करता है कि लड़ाई किस तरह की हो रही है। उदाहरण के तौर पर अगर लड़ाई नजदीकी हुई और अगर दोनों विमान आसमान में एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं, तो भारत का Su-30MKI अपनी अद्भुत फुर्ती और कलाबाजियों के दम पर चीन के J-16 को आसानी से मार गिराएगा।
अब दूरी की लड़ाई में क्या होगा?
आज के दौर में विमान बिना सामने आए मीलों दूर से मिसाइल दागते हैं। इस मामले में फिलहाल चीन का J-16 आगे नजर आता है, क्योंकि उसके पास पहले से आधुनिक AESA रडार और लंबी दूरी की PL-15 मिसाइल का तालमेल है।
हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि चीन की यह बढ़त ज्यादा दिनों की नहीं है। भारत ने अपने सुखोई विमानों के लिए ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड प्रोग्राम तैयार किया है। इसके तहत जब भारत के सुखोई में नया स्वदेशी AESA रडार और नए जमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स लग जाएंगे, तो दूरी की लड़ाई में भी चीन की बढ़त पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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