
जम्मू , 20 June : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जम्मू ने फ्रांस के नीस शहर में आयोजित भारत इनोवेट्स-2026 में शोध, नवाचार, उद्यमिता और डीपटेक तकनीकों के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। 14 से 16 जून तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत और यूरोप के स्टार्टअप, शोधकर्ता, निवेशक, उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए।
आइआइटी जम्मू का प्रतिनिधित्व संस्थान के निदेशक प्रो. मनोज सिंह गौर, शोध एवं परामर्श डीन प्रो. दुरई प्रभाकरण आरटी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डा. राजकुमार वी तथा डा. शन्मुगदास केपी ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक हितधारकों के साथ चर्चा कर उभरती तकनीकों और नवाचार आधारित विकास में संस्थान के योगदान को प्रस्तुत किया।
मैन्युफैक्चरिंग एवं इंडस्ट्री 4.0 के नोडल संस्थान के रूप में आइआइटी जम्मू ने आइआइटी रुड़की के सहयोग से कई उभरते डीपटेक स्टार्टअप्स को मंच प्रदान किया। “फ्रॉम लैब टू फैब: स्केलिंग डीपटेक मैन्युफैक्चरिंग फार द फ्यूचर” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में शोध को व्यावसायिक उत्पादन में बदलने, उद्योग-अकादमिक सहयोग, आधुनिक अवसंरचना और निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
डीपटेक और रोबोटिक्स से लेकर 3D प्रिंटर तक दिखाया दम
कार्यक्रम में एटमबर्ग टेक्नोलाजीज, ब्लूमशीन्स एआइ, एथेरियल मशीन्स, आइरोव, इंडेप्रो डायनेमिक्स, इंसाइट्ज़, थिंक मेटल, अनबाक्स रोबोटिक्स, व्हिजो और एक्सवाइएमए एनालिटिक्स जैसे स्टार्टअप्स की नवीन तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। इन स्टार्टअप्स ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस, औद्योगिक स्वचालन के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियां प्रस्तुत कीं।
आइआइटी जम्मू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा विकसित दो प्रमुख तकनीकों ने विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इनमें डा. राजकुमार वी के नेतृत्व में विकसित मल्टी-मटेरियल एक्सट्रूजन 3डी प्रिंटर शामिल है, जिसका उपयोग स्वास्थ्य, एयरोस्पेस और एनालिटिक्स क्षेत्रों में किया जा सकता है।
वहीं डा. शन्मुगदास केपी के नेतृत्व में विकसित स्काई रीपर आटोनामस टर्बोजेट यूसीएवी ने रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया।कार्यक्रम के दौरान आइआइटी जम्मू के प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ संभावित सहयोग, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त शोध परियोजनाओं पर चर्चा की।
निदेशक प्रो. मनोज सिंह गौर ने कहा कि ऐसे वैश्विक मंच संस्थान को अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और शोध को व्यावहारिक समाधान में बदलने का अवसर प्रदान करते हैं।
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