
Delhi, 18 June : दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम पर लगाये गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस तेजस करिया ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा. कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को लिखित जवाब दाखिल करना है तो 7 बजे तक कोर्ट में जमा करें.
आतंकवादी गतिविधियों के लिए पसंदीदी प्लेटफॉर्म
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या नीट उम्मीदवारों की सुरक्षा के लिए दूसरे यूजर्स के अधिकार को ब्लॉक किया जा सकता है? एसजी मेहता ने कोर्ट को बताया कि टेलीग्राम की प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार अकाउंट डिलीट होने पर सारा डेटा, मैसेज और मीडिया भी डिलीट हो जाते हैं. एसजी ने कहा कि रिपोर्ट्स में टेलीग्राम को आतंकवादी गतिविधियों के लिए पसंदीदी प्लेटफॉर्म बताया गया है.
टेलीग्राम के अस्थायी बैन को सही ठहराया
उन्होंने यह भी कहा कि इसके आर्किटेक्चरल डिजाइन की वजह से सुरक्षा और कानून लागू करने से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में अधिकारियों के सामने कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. सरकार ने टेलीग्राम के अस्थायी बैन को सही ठहराया है. एसजी मेहता ने कहा कि टेलीग्राम नया डार्क वेब, अपराधियों और आतंकवादियों का अड्डा है.
उन्होंने यह भी कहा कि इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राफ नया डार्क वेब बनता जा रहा है. जो अपराधियों को जोड़ रहा है और उनकी अवैध गतिविधियों को सक्षम बना रहा है. केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि टेलीग्राम अपराधियों को आपस में जोड़ता है. अपराधियों ने तेजी से टेलीग्राम को अपना लिया है और डीप वेब लिंक के माध्यम से डार्क वेब फोरम से जुड़ने वाले चैनलों पर लिंक पोस्ट कर रहे हैं.
जिससे अधिकारियों के लिए अपराधियों को ट्रैक करना और उन पर कार्रवाई करना मुश्किल हो गया है. साथ ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट को नियमों का पालन न करने के कारण टेलीग्राम के खिलाफ अलग-अलग देशों द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी है.
कॉन्फॉर्मेशन और उसे पलटना केस के तथ्यों पर निर्भर
मामले की सुनवाई के दौरान टेलीग्राम की ओर से पेश वकील ध्रुव मेहता ने कहा कि फाइनल ऑर्डर एक कॉन्फॉर्मेशन ऑर्डर है. इसपर हाई कोर्ट ने कहा कि यह एक ऑर्डर है. कॉन्फॉर्मेशन और उसे पलटना हर केस के तथ्यों पर निर्भर करता है. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि आप इस आधार पर अधिकार के स्वरूप पर सवाल उठा रहे हैं कि यह आपातकालीन स्थिति नहीं है.
आपका कहना है कि जानकारी को ब्लॉक किया जा सकता है, न कि एप को. तीसरा बिंदु सचिव द्वारा सोच-समझकर निर्णय लेना है और चौथा आनुपतिकता है. अदालत ने टेलीग्राम से यह बताने को कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम मॉनिटरिंग और निगरानी के लिए क्या सिस्टम है.
69 A के तहत पावर का इस्तेमाल किया
पिछली सुनवाई के दौरान टेलीग्राम के वकील ने कोर्ट को बताया था कि नियम 9 में साफ कहा गया है कि इमरजेंसी में पावर का इस्तेमाल और मौका देने की बात कही गई है. 69 A के तहत पावर का इस्तेमाल किया गया है, इसके लिए सेक्रेटरी का संतुष्ट होना जरूरी है. यह कार्रवाई खुद नियमों के खिलाफ है. इसमें दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा था कि मंत्रालय ने 1 जून को यह आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी.
केंद्र सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम पर रोक लगा रखा है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौधोगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 A के तहत यह निर्देश जारी किया है. साथ ही सरकार ने टेलीग्राम का मैसेज-एडिटिंग फीचर पर भी 30 जून तक बैन कर दिया है.
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