
12 June : वैश्विक स्तर पर जारी ‘होर्मुज संकट’ और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच, केंद्र सरकार ने देश को बड़ी आर्थिक राहत देने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लिया है. हरित ईंधन (Green Fuel) यानी एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) शून्य करने के बाद, अब मोदी सरकार ने परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले खास सामानों के आयात पर कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) को पूरी तरह माफ कर दिया है.
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस कड़क अधिसूचना (Nuclear Power Customs Duty Exemption) के मुताबिक, सरकार ने यह टैक्स छूट 1 अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2026 तक की अवधि के लिए पिछली तारीख (Retrospective Effect) से लागू की है, जो देश में सस्ती बिजली और ऊर्जा सुरक्षा का नया रास्ता खोलेगी.
न्यूक्लियर रिएक्टरों के सामान पर टैक्स हुआ ‘नील’
सरकार द्वारा दी गई यह महा-राहत गैर-विकिरणित फ्यूल एलिमेंट्स (Non-Irradiated Fuel Elements) और न्यूक्लियर रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले कार्ट्रिज के आयात पर सीधे तौर पर लागू होगी. ये वो बेहद जरूरी और महंगे पार्ट्स हैं, जो देश के परमाणु बिजलीघरों में चौबीसों घंटे बिजली बनाने के काम आते हैं.
वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि इस तरह के आयात पर कस्टम ड्यूटी न लेने की प्रथा पहले से अनौपचारिक रूप से चल रही थी, लेकिन अब इसे आधिकारिक तौर पर कानूनी मान्यता दे दी गई है. इससे इस पूरी अवधि के दौरान हुए आयात पर कंपनियों की कोई टैक्स देनदारी नहीं बचेगी.
देश में बढ़ेगा स्वच्छ और सस्ता पावर बैकअप
इस मास्टरस्ट्रोक का सबसे सीधा और बड़ा वित्तीय फायदा न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) को होने जा रहा है. NPCIL ही देश के तमाम परमाणु बिजली संयंत्रों के लिए विदेशों से फ्यूल असेंबली और अन्य संवेदनशील सामग्री का आयात करती है.
टैक्स माफ होने से NPCIL और इस सेक्टर से जुड़ी दूसरी भारतीय कंपनियों की उत्पादन लागत (Production Cost) भारी मात्रा में घट जाएगी. इसका सीधा असर देश के बिजली बिलों पर पड़ेगा और आने वाले समय में उद्योगों तथा आम उपभोक्ताओं को मंदी और महंगाई के दौर में भी सस्ती और बिना रुकावट वाली ‘क्लीन एनर्जी’ सुलभ हो सकेगी.
एथेनॉल पेट्रोल के बाद परमाणु चक्रव्यूह
यह फैसला (Nuclear Power Customs Duty Exemption) ऐसे समय में आया है जब भारत खाड़ी देशों के युद्ध के कारण ऊर्जा संकट से जूझ रहा है और तेजी से अपने एनर्जी मिक्स को मजबूत कर रहा है. इससे ठीक पहले सरकार ने 22%, 25%, 27% और 30% तक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर भी केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को पूरी तरह घटाकर शून्य कर दिया था.
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के नियमों के तहत आने वाले इस एथेनॉल-ब्लेंडेड मोटर स्पिरिट पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा. साफ है कि एक तरफ एथेनॉल से पेट्रोल के दाम काबू में रखने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ परमाणु ऊर्जा पर टैक्स हटाकर देश को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का चक्रव्यूह रचा जा चुका है, जो भविष्य में महंगाई पर सबसे बड़ी लगाम साबित होगा.


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