Prayagraj , 2 April: कहते हैं कि अगर सोच सकारात्मक हो और संसाधनों का सही इस्तेमाल किया जाए तो कबाड़ भी कमाल कर सकता है. ऐसा ही एक अनोखा उदाहरण प्रयागराज में देखने को मिला है, जहां एक शख्स ने बेकार समझे जाने वाले जले हुए मोबिल ऑयल (वेस्ट इंजन ऑयल) को उपयोग में लाकर एक खास तरह का चूल्हा तैयार कर लिया है. इस अनोखे जुगाड़ को देखकर हर कोई हैरान है.
सिलेंडर की कमी बनी प्रेरणा
दरअसल, गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती महंगाई ने इस व्यक्ति को कुछ नया सोचने पर मजबूर कर दिया. उसने सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए जानकारी जुटाई और फिर खुद ही एक ऐसा चूल्हा डिजाइन किया, जो पारंपरिक ईंधन पर निर्भर नहीं है. न इसमें लकड़ी लगती है, न कोयला और न ही एलपीजी गैस की जरूरत पड़ती है.
वेस्ट ऑयल बना कमाई का जरिया
इस खास चूल्हे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जले हुए मोबिल ऑयल से चलता है, जिसे आमतौर पर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. अब वही वेस्ट ऑयल उसके लिए ईंधन बन गया है. इस नवाचार से न केवल खर्च कम हुआ है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी यह एक बेहतर विकल्प साबित हो रहा है.
चूल्हे पर बन रही गरमा-गरम जलेबी
इस अनोखे चूल्हे का इस्तेमाल वह व्यक्ति अब रोजमर्रा के काम में कर रहा है. खास बात यह है कि वह इसी चूल्हे पर गरमा-गरम जलेबी बनाकर बेच रहा है और अपनी आजीविका चला रहा है. कम लागत में अधिक फायदा मिलने से उसका यह प्रयोग सफल साबित हो रहा है.
जुगाड़ बना प्रेरणा का स्रोत
यह अनोखी पहल यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार संभव है. प्रयागराज के इस व्यक्ति का जुगाड़ न सिर्फ दूसरों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सही सोच और मेहनत से किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है.







