
15 Jan : मई 2025 की वो तारीखें शायद ही कोई भूल पाएगा, जब भारत ने पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर सरहद पार तहलका मचा दिया था. भारतीय सेना ने जिस तरह पाकिस्तान और PoK में घुसकर आतंकियों के 9 अड्डों को मिट्टी में मिलाया, उसने पड़ोसी मुल्क की नींद उड़ा दी थी. लाहौर के पास मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा का हेडक्वार्टर हो या बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का ठिकाना, भारत की मिसाइलों ने सिर्फ आतंकी ढांचे को निशाना बनाया.
उस वक्त की तस्वीरें और वीडियो आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं. लश्कर का बड़ा कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ, जो खुद को बहुत बड़ा सूरमा समझता है, मुरिदके में अपने मारे गए साथियों के जनाजे में फूट-फूटकर रोता नजर आया था. वह वीडियो पूरी दुनिया में वायरल हुआ, जिसमें रऊफ की आंखों में खौफ साफ दिख रहा था. लेकिन कहते हैं ना कि फितरत इतनी जल्दी नहीं बदलती. वही रऊफ, जो कुछ महीने पहले डरा-सहमा था, अब फिर से प्रोपेगेंडा की राह पर निकल पड़ा है.
रऊफ का नया पैंतरा
हाल ही में रऊफ का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें वह हार को जीत बताने की नाकाम कोशिश कर रहा है. वह कह रहा है कि “अगले 50 साल तक भारत की हिम्मत नहीं होगी पाकिस्तान की तरफ देखने की.” इतना ही नहीं, अपनी साख बचाने के लिए वह अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सहारा ले रहा है. रऊफ का दावा है कि अब दुनिया पाकिस्तान के साथ खड़ी है, जबकि हकीकत इसके ठीक उलट है.
वह तुर्की और बांग्लादेश के नाम लेकर अपने आतंकियों में जोश भरने की कोशिश कर रहा है, ताकि उनका टूटा हुआ हौसला फिर से बढ़ाया जा सके. रऊफ का यह दावा कि “भारत की आंखें निकाल देंगे”, उसकी हताशा को दर्शाता है. सच तो यह है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में जैश के अब्दुल मलिक रऊफ जैसे कई हाई-वैल्यू टारगेट ढेर हो चुके हैं, जिससे आतंकी नेटवर्क की कमर टूट गई है.
क्या था ऑपरेशन सिंदूर का असर?
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत ने अपनी नीति साफ कर दी है. अब आतंकवाद को सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि युद्ध के समान माना जाएगा. 10 मई को जब पाकिस्तान ने गिड़गिड़ाते हुए सीजफायर की गुहार लगाई, तो वह उसकी लाचारी ही थी. आज भले ही सोशल मीडिया पर रऊफ जैसे लोग वीडियो डालकर शेखी बघार रहे हों, लेकिन जमीन पर स्थिति यह है कि पाकिस्तान के ट्रेनिंग कैंप फिर से बनाने की कोशिशें भारतीय रडार पर हैं.
सुरक्षा एजेंसियां इन वीडियो को गंभीरता से ले रही हैं, पर इसे महज एक प्रोपेगेंडा माना जा रहा है. रऊफ के आंसू और अब उसकी ये खोखली धमकियां, दोनों ही एक हारते हुए तंत्र की निशानी हैं.







