
Uttar Pradesh , 26 Dec : अगर आपने साल 2026 का स्वागत बाबा विश्वनाथ के चरणों में मत्था टेककर करने की योजना बनाई है, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है. बनारस की गलियों में महादेव के जयकारों के बीच नए साल का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रशासन ने कुछ बड़े बदलाव किए हैं. नए साल की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने दर्शन की व्यवस्था में कुछ कड़े फैसले लिए हैं, ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो.
3 जनवरी तक लागू रहेंगे ये नियम
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने साफ कर दिया है कि साल के आखिरी दिनों से लेकर 3 जनवरी तक मंदिर में दर्शन का तरीका बदला रहेगा. दरअसल, हर साल 31 दिसंबर और 1 जनवरी को काशी में भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ता है कि पैर रखने तक की जगह नहीं बचती. इसी दबाव को मैनेज करने के लिए मंदिर प्रशासन ने ‘स्पर्श दर्शन’ पर पूरी तरह रोक लगा दी है. यानी अब आप गर्भगृह में जाकर शिवलिंग को छू नहीं पाएंगे, बल्कि आपको दूर से ही ‘झांकी दर्शन’ करके संतोष करना होगा.
अक्सर देखा जाता है कि वीआईपी मूवमेंट की वजह से आम श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है. लेकिन इस बार प्रशासन ने आम आदमी की सहूलियत को ऊपर रखा है. नए नियमों के मुताबिक, न्यू ईयर के मौके पर किसी भी तरह के प्रोटोकॉल दर्शन या विशेष वीआईपी सुविधा पर रोक लगा दी गई है. मंदिर प्रशासन का कहना है कि जब लाखों की भीड़ सामने हो, तो हर भक्त एक समान है. इसलिए, चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे आम कतार का ही हिस्सा बनना पड़ सकता है.
6 लाख भक्तों के आने का अनुमान
प्रशासन के इन कड़े फैसलों के पीछे की वजह भी काफी बड़ी है. आंकड़ों की मानें तो साल के आखिरी दिन और नए साल की सुबह तक काशी में करीब 6 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है. इतनी बड़ी संख्या को संभालना वाराणसी पुलिस और मंदिर प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. इसीलिए सुगम दर्शन के लिए झांकी दर्शन की व्यवस्था को सबसे बेहतर माना गया है, ताकि लाइन लगातार चलती रहे और भीड़ एक जगह इकट्ठा न हो.
भक्तों के लिए सलाह
अगर आप इन दिनों काशी में हैं, तो ध्यान रखें कि मंदिर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त होगी. मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए आपको धैर्य रखना होगा. प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु मंदिर के नियमों का पालन करें और भारी सामान साथ न लाएं.





