
उत्तराखंड , 22 Dec : उत्तराखंड में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमारे लिए यह बेहद चौंकाने वाला है कि उत्तराखंड राज्य और उसके अधिकारी अपनी आंखों के सामने वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को मूक दर्शक की तरह देख रहे है.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई कर रही हैं. इसलिए हम स्वतः संज्ञान लेते हुए यह मामला शुरू करते है. कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को एक जांच कमेटी बनाने का निर्देश दिया है. कमेटी पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी. इस दौरान कोर्ट ने इस अवैध कब्जे वाली जमीन को बेचने और ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी है.
वन भूमि पर बुलडोज़र नहीं, कानून चलेगा- सुप्रीम कोर्ट
साथ ही कोर्ट ने नए निर्माण कार्य पर भी रोक लगा दिया है. कोर्ट ने कहा है कि रिहायशी इलाकों को छोड़कर जो जंगल की जमीन खाली है, उसे वन विभाग अपने कब्जे में लेगा. कोर्ट 29 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वन भूमि पर अतिक्रमण को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता. निजी संस्थाओं या निजी व्यक्तियों द्वारा वन क्षेत्र का व्यावसायिक या अवैध उपयोग संवैधानिक और पर्यावरणीय दोनों मानकों का उल्लंघन है.





