
उत्तर प्रदेश , 4 Dec : प्रयागराज में हर वर्ष संगम तट पर आयोजित होने वाला Magh Mela वर्ष 2026 में और भी भव्य रूप में मनाया जाएगा. करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र यह महापर्व कल्पवासियों के तप, साधना और धार्मिक वातावरण से महीनों तक जीवंत बना रहता है. प्रशासन ने 2026 के माघ मेले की शुरुआत, समापन और प्रमुख मुख्य स्नान तिथियाँ घोषित कर दी हैं, जिसके साथ ही तैयारियों ने तेज गति पकड़ ली है.
44 दिनों का होगा Magh Mela 2026
Magh Mela 2026 की शुरुआत 3 जनवरी (पौष पूर्णिमा) से होगी, जिसे कल्पवासियों के आगमन का पहला शुभ दिन माना जाता है. मेले का समापन 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) को होगा. कुल मिलाकर यह महापर्व 44 दिनों तक चलेगा. इस अवधि में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचकर पवित्र स्नान और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं. पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी के दिनों में संगम क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ उमड़ती है. तमाम अखाड़ों, संत-महात्माओं और साधु-संप्रदायों की उपस्थिति मेले के धार्मिक वातावरण को और अधिक दिव्य बना देती है.
मुख्य स्नान पर्वों की तिथियाँ घोषित (Magh Mela)
मेला प्रशासन ने 2026 के मुख्य स्नान पर्वों की तिथियाँ घोषित कर दी हैं, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है. 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा के साथ मेले का औपचारिक शुभारंभ होगा और इसी दिन से कल्पवासियों का तप आरंभ होता है. इसके बाद 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पावन स्नान होगा, जिसे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का अत्यंत शुभ समय माना जाता है. सबसे महत्वपूर्ण स्नान 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या का है, जिसे माघ मेले का मुख्य और सबसे बड़ा स्नान माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है और अत्यधिक भीड़ इसी दिन देखने को मिलती है. इसके बाद 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का उत्सव ज्ञान, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक बनकर श्रद्धालुओं को संगम तट पर आकर्षित करेगा. 1 फरवरी 2026 को माघी पूर्णिमा के अवसर पर कल्पवासी अपने पूरे महीने के तप और साधना की पूर्णता का स्नान करेंगे, जबकि 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के साथ मेले का समापन होगा और श्रद्धालु अंतिम स्नान कर आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण करेंगे. (Magh Mela)
तैयारियों में जुटा प्रशासन (Magh Mela)
Magh Mela 2026 को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक बनाने के लिए प्रशासनिक तैयारियाँ तेजी से चल रही हैं. संगम क्षेत्र में टेंट सिटी, बैरिकेडिंग, सुरक्षा व्यवस्था, मार्ग-निर्देशन, रोशनी और स्वच्छता जैसी प्रमुख व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है. इस बार प्रशासन मेले में तकनीकी सुविधाओं को और उन्नत कर रहा है, जिसमें स्मार्ट कंट्रोल रूम, ड्रोन सर्विलांस, LED मार्गदर्शन प्रणाली, मोबाइल शौचालय, आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्र, तथा दो-पहिया शटल सेवा जैसी सुविधाएँ शामिल की जा रही हैं. गंगा-यमुना के जलस्तर, प्रवाह और भू-भाग को ध्यान में रखते हुए सेक्टरों का निर्धारण किया जा रहा है, जिससे भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर हो सके.
आस्था, तप और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम
Magh Mela केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है. कल्पवासियों का महीनों तक संगम तट पर रहकर साधना करना आत्मिक शक्ति और मानसिक शुचिता का अद्भुत प्रतीक है. संत-महात्माओं के प्रवचन, संतों की परंपरागत शोभायात्राएँ और संगम की महिमा इस मेले को विशिष्ट बनाती हैं. वर्ष 2026 में आयोजित होने वाला यह महासंगम श्रद्धालुओं के लिए एक बार फिर दिव्य अनुभूति लेकर आएगा. प्रमुख मुख्य स्नान तिथियों के घोषित होने के बाद श्रद्धालुओं में तैयारियाँ और उत्साह और अधिक बढ़ गया है.





