
जम्मू , 22 Nov : जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने बहुचर्चित जनहित याचिका की अंतिम सुनवाई 18 दिसम्बर के लिए निर्धारित की है, जिसमें जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 में दिसम्बर 2023 में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई है। इस संशोधन के तहत जम्मू कश्मीर विधानसभा की निर्धारित सीटों के अतिरिक्त 5 सदस्यों को उप-राज्यपाल द्वारा नामित करने का अधिकार दिया गया है।
मामले की सुनवाई शुक्रवार को न्यायाधीश संजीव कुमार और राजेश सेखरी की विशेष खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने पक्षकारों से पूछा कि क्या वे अंतिम बहस के लिए तैयार है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए एडवोकेट प्रशांत सेन ने संक्षिप्त स्थगन का अनुरोध करते हुए आश्वासन दिया कि अगली तारीख पर अंतिम बहस की जाएगी। इस पर खंडपीठ ने मामले को 18 दिसम्बर के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमती दे दी। उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रवींद्र शर्मा की तरफ से अक्तूबर 2024 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही है।
उन्होंने पहले सुप्रीम कोर्ट और बाद में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में इस संशोधन को चुनौती दी थी जिसके तहत पुनर्गठन अधिनियम में धाराएं 15, 15एऔर 15बी जोड़कर उप-राज्यपाल को 5 विधायकों को नामित करने का अधिकार दिया गया है। हाईकोर्ट ने अक्तूबर को प्रांरभिक सुनवाई के दौरान इस मामले को जन महत्व का मानते हुए भारत सरकार और उप-राज्यपाल कार्यालय से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा था। याचिका में सभी पक्षों की दलीलें दाखिल हो चुकी हैं और भारत सरकार व उप-राज्यपाल कार्यालय ने अपने जवाब में नामांकन के प्रावधानों को उचित ठहराया है।







