
श्रीनगर , 17 Sep : श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग के लगभग 3 सप्ताह तक बाधित रहने के कारण कश्मीर के बागवानी क्षेत्र को हुए भारी नुकसान के बीच घाटी के बाहर सेब ले जाने के लिए एक समर्पित मालगाड़ी की शुरूआत से कुछ राहत मिली है, लेकिन सेब उत्पादक इससे खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि यह सेब परिवहन के लिए पर्याप्त नहीं है।
गौरतलब है कि उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को बड़गाम से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई इस ट्रेन के जरिए पहली बार घाटी से ट्रेन से भारी मात्रा में सेब की ढुलाई की जा रही है। सेब उत्पादकों का कहना है कि यह सुविधा विशाल मांग-आपूर्ति शृंखला को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
उधर, रेलवे अधिकारियों ने पार्सल कार्गो ट्रेन को ‘ऐतिहासिक उपलब्धि और बड़ा गौरव बताया और कहा कि जब यह सेवा शुरू की गई थी, तब से लगभग 700 टन सेब कश्मीर से भेजे जा चुके हैं।
सोपोर फल मंडी के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक ने कहा, ‘8 बोगियों वाली यह ट्रेन लगभग 10 ट्रकों का भार ढोती है। मांग पूरी करने के लिए हमें हर दिन कई और बोगियों की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि एशिया के सबसे बड़े फल व्यापार केंद्रों में से एक सोपोर को ही कश्मीर के बाहर के बाजारों में सेब ले जाने के लिए रोजाना 50 से 100 बोगियों की जरूरत होगी।





