
राजस्थान , 21 Aug : राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. जिले की फलौदी रेंज के दुमोदा गांव में एक खूंखार लेपर्ड यानी तेंदुए ने घर के आंगन में खेल रहे तीन साल के मासूम बच्चे को परिवार के बीच से मुंह में दबोचकर जंगल में ले गया. इस भयानक घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है.
परिजनों के सामने से उठा ले गया लेपर्ड
जानकारी के मुताबिक, दुमोदा गांव निवासी संजय बैरवा का तीन वर्षीय बेटा दिलखुश अपने घर के आंगन में परिजनों के बीच खेल रहा था. इसी दौरान अचानक एक लेपर्ड वहां आ धमका और पलक झपकते ही मासूम पर हमला कर दिया. लेपर्ड बच्चे को अपने मुंह में दबोचकर जंगल की तरफ भागने लगा. बच्चे की मां और पास बैठे परिजनों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की और चीख-पुकार मचाई, लेकिन वहशी जानवर के चंगुल से मासूम को नहीं बचा सके. शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और हाथों में लाठी-डंडे लेकर लेपर्ड का पीछा करना शुरू किया. कुछ ग्रामीण तुरंत फलौदी रेंज की वन चौकी भी पहुंचे ताकि अधिकारियों को सूचना दी जा सके.
घने जंगल में मिला मासूम का शव
ग्रामीणों ने जब गांव के पास स्थित जंगल और पहाड़ी की तरफ तलाश शुरू की, तो उन्हें नन्हा दिलखुश गंभीर हालत में झाड़ियों के बीच पड़ा हुआ मिला. ग्रामीण तुरंत बच्चे को लेकर जिला अस्पताल भागे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक मासूम चार बहनों के बीच इकलौता और सबसे छोटा भाई था. इस आकस्मिक मौत के बाद से परिवार में कोहराम मचा है और मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है.
वन विभाग के खिलाफ फूटा गुस्सा
इस घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के रवैये को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला. ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के घंटों बाद भी कोई भी वन अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा. गुस्से में आकर ग्रामीणों ने फलौदी रेंज वन चौकी पर भी हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन किया.
ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में आए दिन हिंसक वन्यजीवों का मूवमेंट बना रहता है, लेकिन वन विभाग इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है. ग्रामीणों की मांग है कि जब तक पीड़ित परिवार को उचित न्याय नहीं मिलता और आबादी क्षेत्रों में वन्यजीवों के खतरे को रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक वे बच्चे का शव नहीं लेंगे और बड़ा आंदोलन करेंगे.
पुलिस की समझाइश के बाद बनी सहमति
मामले की गंभीरता को देखते हुए देर रात पुलिस और वन विभाग के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे. डीएफओ मानस सिंह ने मीडिया को बताया कि यह बेहद दुखद घटना है. अधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों से लंबी बातचीत की और समझा-बुझाकर स्थिति को संभाला.
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच चार सूत्री मांगों पर सहमति बनी है. अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि नियमानुसार पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा, परिवार के किसी एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने का प्रयास किया जाएगा, और इलाके में आतंक का पर्याय बने लेपर्ड को पकड़ने या वहां से हटाने के लिए तुरंत विशेष टीमों को तैनात कर दिया गया है.



