
नई दिल्ली , 3 July : वैश्विक उथल-पुथल और कूटनीति के इस दौर में नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस से एक ऐसी खबर आई है, जिसने हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) की पूरी जियो-पॉलिटिक्स को हिला कर रख दिया है. भारत और जापान (India-Japan) ने रक्षा, ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे बेहद ‘सेंसिटिव और खूंखार’ सेक्टर्स में सहयोग को नई मजबूती देने के लिए कई बड़े मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन (MoC) पर हस्ताक्षर किए हैं. जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची (Sanae Takaichi) के इस भारत दौरे ने दोनों देशों की स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में एक नया और ‘विस्फोटक’ अध्याय जोड़ दिया है.
रक्षा, AI और सेमीकंडक्टर पर फोकस
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सिर्फ कागजी बातें नहीं हुईं, बल्कि सीधा भविष्य की तकनीक पर वार किया गया. दोनों देशों ने साफ़ कर दिया है कि उनका फोकस रक्षा सहयोग को ‘फौलादी’ बनाने, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर (Semiconductors), डिजिटल टेक्नोलॉजी और उभरती हुई AI (Artificial Intelligence) तकनीकों पर रहेगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ सीधे तौर पर समंदर और तकनीक के क्षेत्र में उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों (खासकर चीन) के लिए एक कड़ा संदेश है.
‘मेरी छोटी बहन सानाए ताकाइची…’
कूटनीति से इतर, इस मुलाकात में जो ‘गर्मजोशी’ दिखी, उसने सभी का दिल जीत लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची को अपनी ‘छोटी बहन’ बताते हुए दोनों देशों के रिश्तों को भरोसे और मित्रता की सबसे बड़ी मिसाल करार दिया. पीएम मोदी ने हालिया G7 शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा, “मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के दौर में आपसी विश्वास ही सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है, और मुझे गर्व है कि भारत-जापान की साझेदारी इस कसौटी पर 100 टका खरी उतरती है.”
भरोसे की नई विकास यात्रा
ऑटोमोबाइल हो या इलेक्ट्रॉनिक्स, जापान ने पिछले कई दशकों में भारत की विकास यात्रा में जो ‘साइलेंट’ भूमिका निभाई है, वह अब पूरी दुनिया के सामने दहाड़ रही है. दिल्ली में हुए ये नए समझौते सिर्फ दो देशों के हस्ताक्षर नहीं हैं, बल्कि ये इस बात की सबसे बड़ी ‘गारंटी’ हैं कि भारत और जापान का यह ‘महा-गठबंधन’ आने वाले समय में पूरी दुनिया की आर्थिक और तकनीकी दिशा तय करने वाला है.






