
श्रीनगर , 26 June : जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हम सब मुहर्रम के महीने और 10वें मुहर्रम आशूरा की अहमियत जानते हैं।
हज़रत अली की कुर्बानी और उस कुर्बानी से मिले सबक, हम जब तक उन्हें याद रखेंगे, तब तक हमारी बेहतरी होगी लेकिन जब हम इन सबकों को भूल जाते हैं, तो हमें तबाही और बर्बादी का सामना करना पड़ता है… इस मौके पर मैं यही उम्मीद करूंगा कि वे दिन लौट आएं और आशूरा का जुलूस अपने असली रास्ते पर लौट आए। हमने पहले भी जुलूस को उसके असली रास्ते पर वापस लाने की कई कोशिशें की हैं, लेकिन हम पूरी तरह से ऐसा नहीं कर पाए। हम आगे भी इसके लिए कोशिश करते रहेंगे।”
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुहर्रम के पवित्र महीने और 10 मुहर्रम यानी आशूरा के मौके पर अहम बयान दिया है। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए कहा कि उससे मिले सबक को अपनाकर ही समाज की बेहतरी संभव है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि वे दिन फिर लौटें जब आशूरा का जुलूस अपने असली और पारंपरिक रास्ते से निकले। उन्होंने माना कि सरकार ने पहले भी जुलूस को उसके मूल मार्ग पर वापस लाने की कई कोशिशें की हैं। हालांकि पूरी तरह सफलता नहीं मिली, लेकिन प्रयास जारी रहेंगे।
शिया समुदाय में सकारात्मक संदेश
आपको बता दें कि श्रीनगर में आशूरा का मुख्य जुलूस दशकों से सुरक्षा कारणों से अपने पारंपरिक मार्ग आबी गुज़र से लाल चौक होते हुए ज़ादिबल तक नहीं निकल पा रहा है। 1990 के बाद से इस पर रोक थी। 2023 में 34 साल बाद प्रशासन ने कुछ शर्तों के साथ सुबह 6 से 8 बजे तक पुराने रूट पर जुलूस की अनुमति दी थी। इसे एक बड़ी पहल माना गया था। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार की मंशा साफ है। वे चाहते हैं कि शिया समुदाय अपनी धार्मिक परंपरा को पूरी आज़ादी और सम्मान के साथ निभा सके। इसके लिए प्रशासन और समुदाय के बीच बातचीत का दौर जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री के इस बयान को दो नजरिए से अहम माना जा रहा है। मुहर्रम के मौके पर सीएम ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को अन्याय के खिलाफ खड़े होने का प्रतीक बताया। यह संदेश सभी समुदायों के लिए एकजुटता का है। वहीं पुराने रूट पर जुलूस निकालने की बात दोहराकर सरकार ने भरोसा दिया है कि वह धार्मिक आज़ादी को लेकर गंभीर है। इससे शिया समुदाय में सकारात्मक संदेश गया है।
कुर्बानी देने की याद का महीना
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुहर्रम सिर्फ मातम का नहीं बल्कि हक और सच के लिए कुर्बानी देने की याद का महीना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इमाम हुसैन के सिद्धांतों को जीवन में उतारें। साथ ही भरोसा दिलाया कि सरकार जुलूस को उसके असली रास्ते पर लाने के लिए सभी पक्षों से बात करेगी और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। वहीं प्रशासन ने मुहर्रम के दौरान श्रीनगर समेत पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है ताकि जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों।
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