
Sensex-Nifty crash Middle East tension , 30 Mar : शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन ‘हाहाकार’ लेकर आया. चालू वित्त वर्ष (2025-26) के आखिरी कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए. दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,635.67 अंक (2.22%) गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ. वहीं एनएसई निफ्टी 488.20 अंक (2.14%) की कमजोरी के साथ 22,331.40 के स्तर पर आ गया.
दरअसल बाजार की इस चौतरफा गिरावट (Stock Market Crash India) का मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है, जिसने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और सप्लाई चेन को लेकर डर पैदा कर दिया है. निवेशकों की घबराहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप शुक्रवार के 422 लाख करोड़ से घटकर 412 लाख करोड़ रुपये रह गया.
बैंकिंग और डिफेंस सेक्टर में क्यों मची भगदड़?
बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि निफ्टी के लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में डूबे रहे. सबसे अधिक मार पीएसयू बैंक (4.56%) और फाइनेंशियल सर्विसेज (3.49%) पर पड़ी. इसके अलावा रियल्टी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर में भी 2% से 3% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई. लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 2.6% से ज्यादा टूट गए, जिससे रिटेल निवेशकों को भारी चपत लगी.
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जिसमें एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज ‘टॉप लूजर्स’ की सूची में शामिल रहे. केवल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में टिक सके.
FY26 के आखिरी दिन कैसी रही चाल?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वित्त वर्ष के आखिरी दिन बाजार की शुरुआत ही भारी गिरावट (गैप डाउन) के साथ हुई थी. शुरुआती सत्र में हल्की रिकवरी की कोशिश जरूर हुई लेकिन ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव इतना हावी था कि बाजार संभल नहीं पाया.
एसबीआई सिक्योरिटीज के जानकारों का मानना है कि निफ्टी के लिए अब 22,200 से 22,150 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट का काम करेगा. यदि मध्य पूर्व का तनाव और बढ़ता है,तो निफ्टी फिसलकर 22,000 या 21,800 के स्तर (Nifty Fall) तक भी जा सकता है. फिलहाल बाजार के लिए 22,500 का स्तर एक बड़ी रुकावट (Resistence) बना हुआ है.
नए वित्त वर्ष की शुरुआत कैसी रहेगी?
इजरायल-ईरान और आसपास के क्षेत्रों में जारी संघर्ष के चलते निवेशकों ने ‘जोखिम’ लेने के बजाय सुरक्षित ठिकानों (जैसे सोना) की ओर रुख करना शुरू कर दिया है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिख रहा है.
जानकारों की सलाह है कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और बाजार में स्थिरता आने तक आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए. यह गिरावट उन लोगों के लिए एक सबक है जो भू-राजनीतिक (Geopolitical) स्थितियों को कमतर आंकते हैं.







