
धार्मिक संस्कार , 24 Mar : भारत में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि एक पवित्र धार्मिक संस्कार माना जाता है. हमारे यहां शादी-ब्याह को लेकर ढेरों रीति-रिवाज हैं, जिनका पालन सदियों से होता आ रहा है. इन्हीं में से एक पुरानी परंपरा यह है कि जब तक बड़े भाई के सिर पर सेहरा न सज जाए, तब तक छोटे भाई की शादी नहीं करनी चाहिए. आज के भागदौड़ भरे दौर में भले ही कई लोग इसे सिर्फ एक पुरानी सोच मानते हों, लेकिन इसके पीछे के धार्मिक और सामाजिक कारण काफी गहरे हैं.
क्या है ‘परिवेत्ता दोष’?
हिंदू शास्त्रों की मानें तो बड़े भाई के कुंवारे रहते हुए छोटे भाई का पहले विवाह कर लेना ‘परिवेत्ता दोष’ की श्रेणी में आता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दोष के कारण छोटे भाई के वैवाहिक जीवन में अड़चनें आ सकती हैं या परिवार में सुख-शांति की कमी हो सकती है. पुराने समय में इस नियम का इतना कड़ा पालन होता था कि इसे मर्यादा के उल्लंघन के रूप में देखा जाता था. बड़े भाई को हमेशा से पिता के समान दर्जा दिया गया है, इसलिए हर मांगलिक कार्य में पहला अधिकार भी उसी का माना जाता है. अगर यह क्रम टूटता है, तो इसे परंपरा के विरुद्ध माना जाता है.
सिर्फ छोटा ही नहीं, बड़े भाई को भी लगता है दोष?
हैरानी की बात यह है कि कुछ मान्यताओं के अनुसार, इस स्थिति में सिर्फ छोटे भाई को ही नहीं, बल्कि बड़े भाई को भी दोष का भागीदार माना जाता है. यदि छोटा भाई पहले घर बसा ले और बड़ा भाई बाद में शादी करे, तो दोनों के ही जीवन में उतार-चढ़ाव आने की आशंका जताई जाती है. यही वजह है कि पुराने बुजुर्ग हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि घर की शहनाई हमेशा उम्र के हिसाब से ही बजे.
कब मिल सकती है इस नियम से छूट?
हालांकि, हमारे शास्त्रों में हर समस्या का समाधान और अपवाद भी दिया गया है. अगर बड़ा भाई खुद ही शादी न करने का फैसला कर ले, संन्यास ले ले या ब्रह्मचर्य का पालन करने की कसम खा ले, तो ऐसी स्थिति में छोटे भाई पर कोई दोष नहीं लगता. इसके अलावा, अगर बड़ा भाई किसी गंभीर शारीरिक या मानसिक समस्या से जूझ रहा हो या देश से बाहर हो और उसकी शादी में बहुत लंबा वक्त लगने वाला हो, तब भी विशेष परिस्थितियों में छोटे भाई का विवाह किया जा सकता है.







