
Greenland , 19 Jan : अमेरिका का दुश्मन होना खतरनाक है, लेकिन दोस्त होना घातक है, प्रसिद्ध अमेरिकी राजनयिक हेनरी किसिंजर की ये बात ग्रीनलैंड विवाद पर एकदम सटीक बैठती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड विवाद को लेकर बिल्कुल भी समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं. उन्होंने शनिवार को कसम खाई कि जबतक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिल जाती तबतक वो अपने यूरोपीय सहयोगियों पर टैरिफ लगाते रहेंगे. अब फ्रांस और जर्मनी ट्रंप को सबक सिखाने के मूड में दिख रहे हैं.
जर्मनी और फ्रांस के वित्त मंत्रियों ने सोमवार को कहा कि वे अमेरिका के ब्लैकमेल के आगे ना तो झुकेंगे ना ही हटेंगे. इन दो यूरोपीय शक्तियों ने ट्रंप के टैरिफ धमकियों पर पलटवार करते हुए जवाब देने की बात कही.
जर्मनी के वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबील ने फ्रांस के अपने समकक्ष से मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेता संयुक्त रूप से अमेरिका को जवाब देने पर सहमत दिखाई दिये. उन्होंने कहा कि, करीब 250 साल के सहयोगियों के बीच ब्लैकमेलिंग बिल्कुल मंजूर नहीं है.
यूरोप करेगा पलटवार
यूरोपीय संघ के नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति के ब्लैकमेलिंग पर जवाब देने की बात कही. इस संबंध में ब्रुसेल्स में एक इमरजेंसी शिखर सम्मेलन रखा गया है. जिसमें यूरोप में 107 अरब डॉलर के अमेरिकी आयात पर जवाबी टैरिफ लगाने का भी एक प्रावधान है. जो 6 फरवरी से खुद लागू हो जाएगा.
जर्मन वित्तमंत्री क्लिंगबील ने कहा कि अब हद पार हो चुकी है. हमने हाथ बढ़ाया है, लेकिन हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम ब्लैकमेल होने के लिए तैयार नहीं हैं.
व्यापार कर सकता है प्रतिबंधित
यूरोपीय संघ के पास अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए व्यापार प्रतिबंध भी एक विकल्प मौजूद है. जिसमें निवेशों या बैंकिंग गतिविधियों तक अमेरिका के पहुंच को सीमित करना शामिल है.
फ्रांस के विदेश मंत्री लेस्क्योर ने कहा कि यूरोपीय संघ इन उपायों पर विचार कर सकता है. फ्रांस चाहता है कि हम इन संभावनाओं पर विचार करें. हमें उम्मीद है कि इससे कोई हल निकलेगा.
जर्मनी ने यह साफ करते हुए कहा कि उनका तनाव बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि इससे अमेरिका और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा.
यूरोप है कमजोर- अमेरिकी विदेश मंत्री
गौरतलब है कि अमेरिकी विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि यूरोप के कमजोर होने की वजह से ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण जरूरी हो गया है. इससे विश्व में स्थिरता आएगी.
अमेरिका के इस बयान पर अब यूरोपीय देश जबाव देने की तैयारी में हैं. फ्रांसीसी नेता ने कहा कि आने वाले दिनों, हफ्तों या सालों में अब यूरोप का उद्वेश्य स्कॉट बेसेंट को जवाब दिया जाएगा. हम यह साबित करेंगे कि अमेरिका यूरोप को लेकर गलतफहमी पाल रखा है.
लेस्क्योर ने कहा कि यूरोप को अपनी तकनीकी बढ़त और उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत है. ताकि यह साबित हो सके कि यूरोप वास्तव में कितना मजबूत है.
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