चंडीगढ़ , 11 Sep : भैंस के बछड़ा देने के बाद उसके पास कुत्ते के पहुंचने को लेकर शुरू हुआ विवाद करीब तीन दशक बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचकर खत्म हो गया।
हाई कोर्ट ने 1996 में हुए हमले के मामले में दो आरोपितों की दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन उनकी उम्र, पहले ही काटी जा चुकी जेल की अवधि और करीब 18 वर्ष तक चली पुनरीक्षण याचिका को देखते हुए सजा को जितनी अवधि जेल में रह चुके हैं, उतनी तक सीमित कर दिया। साथ ही आरोपितों से जमा कराया गया कुल 4250-4250 रुपये का जुर्माना घायल को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया।
ओम प्रकाश ने कुत्ते को रोकने के लिए कहा, लेकिन बात नहीं बनी। दोपहर करीब एक बजे जब वह धान कटवाकर घर लौटा तो उसकी मां ने आरोपित राजू और देवा से कुत्ते को रोकने के लिए बोला। इसी बात पर दोनों भड़क गए।
आरोप था कि राजू गंडासी और देवा लाठी लेकर आए और परिवार को सबक सिखाने की धमकी दी। राजू ने गंडासी से ओम प्रकाश पर वार किया। बचाव में हाथ आगे करने पर वार उसके बाएं हाथ पर लगा। इसके बाद देवा ने उसके बाएं पैर पर लाठी से हमला किया।
घायल को अस्पताल ले जाया गया। एक्स-रे में उसके हाथ की चोट में फ्रैक्चर सामने आया, जिसके बाद मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 326 भी जोड़ दी गई।
ट्रायल कोर्ट ने 2006 में दोनों को दोषी ठहराते हुए धारा 323/34 के तहत तीन महीने और धारा 326/34 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। 2008 में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने भी उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा।
हाई कोर्ट में आरोपितों ने दोषसिद्धि को चुनौती नहीं दी और केवल सजा कम करने की मांग की। अदालत ने पाया कि राजू करीब दो महीने सात दिन और देवा एक महीने 25 दिन जेल में रह चुके हैं। घटना के समय उनकी उम्र 22 और 26 वर्ष थी, जबकि अब वे करीब 52 और 56 वर्ष के हैं। पुनरीक्षण याचिका वर्ष 2008 से लंबित थी।
जस्टिस मनदीप पन्नू ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दर्ज दोषसिद्धि में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। हालांकि, लंबे समय से चले आ रहे मुकदमे और आरोपितों की वर्तमान उम्र को देखते हुए जेल की मूल सजा को पहले से भुगती अवधि तक सीमित करना न्यायोचित होगा।
दोनों पर लगाया गया 4250 रुपये का जुर्माना पहले ही जमा हो चुका था। अदालत ने यह राशि घायल ओम प्रकाश को मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश दिया।






