New Delhi , 8 Sep : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार देर रात तक मंत्रिपरिषद के करीब 20 राज्य मंत्रियों के साथ लगभग तीन घंटे लंबी बैठक की. बैठक में बीजेपी के अलावा सहयोगी दलों के मंत्री और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री भी शामिल रहे. सूत्रों के मुताबिक, संभावित कैबिनेट फेरबदल की अटकलों के बीच इस बैठक को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है.
बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के कामकाज, उनके प्रदर्शन, सरकार की योजनाओं के प्रभाव और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर विस्तार से चर्चा की. पीएम मोदी का जोर इस बात पर रहा कि मंत्री सिर्फ अपने मंत्रालय के आंकड़ों और उपलब्धियों तक सीमित न रहें, बल्कि यह स्पष्ट करें कि उनकी व्यक्तिगत भूमिका और योगदान क्या रहा है.
आंकड़े नहीं, अपना योगदान बताएं
बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि मंत्रालय से जुड़े आंकड़े और रिपोर्ट तो संबंधित सचिव भी प्रस्तुत कर सकते हैं. ऐसे में मंत्री को यह बताना चाहिए कि उन्होंने स्वयं क्या नया किया, किन फैसलों में उनकी भूमिका रही और उनके प्रयासों से जनता को कितना फायदा पहुंचा.
मंत्रियों से यह भी पूछा गया कि उनके मंत्रालय की योजनाओं से कितने लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव आया है. यानी सरकार का फोकस केवल योजनाओं के क्रियान्वयन या आंकड़ों तक नहीं, बल्कि ग्राउंड पर उनके असर को मापने पर भी दिखाई दिया.
विकसित भारत 2047 के लिए विजन और रोडमैप पर जोर
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय विकसित भारत 2047 रहा. प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से अपने-अपने मंत्रालय के लिए स्पष्ट विजन और रोडमैप साझा करने को कहा. उनसे अगले पांच वर्षों के साथ-साथ 2047 तक की दीर्घकालिक कार्ययोजना के बारे में भी जानकारी ली गई.
इस दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि अलग-अलग मंत्रालय विकसित भारत के लक्ष्य में किस तरह योगदान दे सकते हैं और उनकी योजनाओं का दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा.
सामाजिक न्याय और युवाओं पर विशेष फोकस
बैठक में सामाजिक न्याय, आदिवासी कल्याण, युवा और शिक्षा जैसे विषयों पर विशेष जोर रहा. मंत्रियों से पूछा गया कि दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और युवाओं के लिए उनके मंत्रालय की ओर से कौन-सी विशेष पहल की गई हैं और इनका लाभ लक्षित वर्गों तक किस तरह पहुंच रहा है.
इससे संकेत मिलता है कि सरकार आने वाले समय में कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ उनके लक्षित सामाजिक प्रभाव और जनभागीदारी पर भी अधिक जोर देना चाहती है.
सोशल मीडिया पर भी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड
बैठक का एक अहम हिस्सा मंत्रियों के सोशल मीडिया प्रदर्शन की समीक्षा भी रहा. प्रधानमंत्री ने यह जानना चाहा कि मंत्री सरकार की योजनाओं, नीतियों और विभिन्न मुद्दों को सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक किस तरह पहुंचा रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रियों से उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स, डिजिटल एंगेजमेंट और सरकार के नैरेटिव को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने को लेकर भी सवाल किए गए. छात्रों से जुड़े आंदोलनों और विपक्ष की ओर से बनाए जा रहे नैरेटिव का सोशल मीडिया पर किस तरह जवाब दिया गया, इस पर भी चर्चा हुई.
मंत्रियों को उनके सोशल मीडिया प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड भी दिया गया. सूत्रों के मुताबिक, किसी भी राज्य मंत्री की सोशल मीडिया परफॉर्मेंस को पूरी तरह संतोषजनक रैंकिंग नहीं मिली और सभी को इसमें सुधार की जरूरत बताई गई.
मंत्री केवल प्रशासक नहीं, सरकार का चेहरा भी
पूरी बैठक का व्यापक संदेश यही रहा कि मंत्री की भूमिका केवल मंत्रालय की प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए. प्रधानमंत्री का जोर मंत्रियों की व्यक्तिगत जवाबदेही, विजन, पब्लिक कनेक्ट और डिजिटल मौजूदगी को मजबूत करने पर रहा.
करीब तीन घंटे चली इस बैठक को इसी लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि सरकार में मंत्रियों के प्रदर्शन का आकलन अब केवल मंत्रालय की उपलब्धियों और सरकारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत योगदान, जनता के साथ संपर्क और भविष्य की कार्ययोजना जैसे पहलुओं से भी जोड़ा जा रहा है.
हालांकि, बैठक को संभावित कैबिनेट फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन मंत्रियों के साथ हुई इस समीक्षा से फिलहाल सबसे बड़ा संकेत यही निकलता है कि सरकार के अगले चरण में डिलीवरी के साथ-साथ मंत्री की व्यक्तिगत परफॉर्मेंस और पब्लिक कनेक्ट भी महत्वपूर्ण कसौटी रहने वाले हैं.
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