मध्य प्रदेश , 7 sEP : मध्य प्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील में अवैध और जहरीली शराब ने फिर से तबाही मचा दी है. जहरीली शराब के खौफनाक तांडव (Sagar Banda sharab kand) से अब तक 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 4 गंभीर मरीजों का इलाज जारी है और 1 को एयरलिफ्ट करके भोपाल AIIMS भेजा गया है. घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि लगभग 40 से 45 लोग खतरे से बाहर हैं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए लापरवाह अफसरों को तत्काल निलंबित कर दिया है.
इसके अलावा उन्होंने बताया कि दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शराब माफिया की जड़ें कितनी गहरी हैं, जो चंद रुपयों के लालच में मासूमों की जान ले रहे हैं.
एमपी के सागर का ताजा मामला(Sagar Banda sharab kand)
सागर के बंडा में घूघर, नौराज और बराज गांवों में हुई इस त्रासदी के पीछे एक संगठित गिरोह का हाथ सामने आ रहा है. शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि ब्रांडेड बोतलों की डुप्लीकेट कॉपी बनाकर उनमें जहरीला मिथाइल अल्कोहल (मेथॉल) मिलाकर बेचा जा रहा था.
इस पूरे जहरीले नेटवर्क के तार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के ललितपुर गैंग से जुड़े बताए जा रहे हैं. शराब माफिया ब्रांडेड रैपर का सहारा लेकर सीधा-साधा ग्रामीणों को अपनी ठगी और जहर का शिकार बना रहे थे, जिससे देखते ही देखते लाशों का अंबार लग गया.
एमपी में पिछले 5 साल के 5 बड़े कांड
मध्य प्रदेश के लिए जहरीली शराब से मौतों का यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले 5 सालों में प्रदेश ने कई भीषण शराब कांड देखे हैं. जनवरी 2021 में मुरैना में जहरीली शराब पीने से 24 लोगों की मौत हो गई थी और कई की आंखों की रोशनी चली गई थी. अक्टूबर 2020 में उज्जैन में ‘पोटली वाली’ जहरीली शराब ने 16 गरीब मजदूरों की जान ले ली थी, जिसमें पुलिस और निगम कर्मचारियों की साठगांठ पाई गई थी. इसके अलावा इंदौर में 2021 में मेथॉल वाली शराब से 5 मौतें और जनवरी 2022 में भिंड के इंदुर्खी में पंचायत चुनाव के दौरान शराब बांटने से 4 लोगों की मौत हो चुकी है.
देश के सबसे बड़े जहरीली शराब कांड
अगर देश के इतिहास के सबसे भीषण जहरीली शराब कांडों पर नजर डालें तो आंकड़े रोंगटे खड़े कर देते हैं. साल 2008 में कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर बेची गई मेथॉल युक्त देसी शराब ने 340 से अधिक गरीबों की बलि ले ली थी. यह आधुनिक भारत का सबसे बड़ा शराब कांड माना जाता है. इससे पहले 1981 में बेंगलुरु के टैनरी रोड इलाके में इंडस्ट्रियल स्प्रिट से तैयार जहरीली शराब पीने के कारण 300 से ज्यादा लोगों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले की नींव हिला दी थी.
साल 2011 में पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना (संग्रामपुर) में रेलवे स्टेशनों के पास बेची गई जहरीली शराब से 170 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी. इसके बाद 2019 में असम के गोलाघाट और जोरहाट जिलों के चाय बागानों में ‘सुलई’ नामक अवैध शराब पीने से 160 से अधिक मजदूर काल के गाल में समा गए थे. वहीं साल 2020 में कोविड लॉकडाउन के तुरंत बाद पंजाब के तरनतारन, अमृतसर और गुरदासपुर में जहरीली देसी शराब की खेप से 120 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, जहां केमिकल ने लोगों के फेफड़े और आंखें जला दी थीं.
कब थमेगा ‘मौत का यह व्यापार’?
चाहे सागर का हालिया कांड (Sagar Banda sharab kand) हो या पंजाब और कर्नाटक की पुरानी त्रासदियां, हर बार घटना के बाद जांच कमेटियां बैठती हैं और चंद छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरा दी जाती है. लेकिन असली गुनहगार यानी ‘केमिकल माफिया’ और बैकग्राउंड में बैठे बड़े सिंडिकेट बच निकलते हैं.
सागर कांड के बाद जनता में भारी आक्रोश है और मांग की जा रही है कि केवल अफसरों के सस्पेंशन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जहरीली शराब के सौदागरों के अवैध साम्राज्य पर बुलडोजर चलाकर उन्हें फांसी के तख्ते तक पहुंचाया जाए ताकि भविष्य में कोई किसी के घर का चिराग बुझाने की हिम्मत न कर सके.






