
दिल्ली , 25 Aug : दिल्ली के सत्ता के गलियारों में जब केंद्रीय कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट चल रही है. ठीक उसी वक्त केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने पूरी सियासत में भूचाल ला दिया. एक सार्वजनिक मंच से बेबाक मंत्री ने भरे गले और संजीदा लहजे में कहा कि अब मैं पहले जितना काम नहीं कर सकता, नई पीढ़ी को मौका मिलना चाहिए. बस फिर क्या दिल्ली से लेकर मुंबई तक यह खबर आग की तरह फैल गई कि क्या बीजेपी का सबसे मजबूत स्तंभ अब संन्यास की राह पर है?
लेकिन राजनीति में जो दिखता है, असल कहानी हमेशा उसके पीछे छिपी होती है. जैसे ही ‘गडकरी के रिटायरमेंट’ की ब्रेकिंग चलने लगी, बैकग्राउंड में ऐसा सियासी ट्विस्ट आया जिसने सबको चौंका दिया.
दर्द या छिपी थी गहरी सियासी चेतावनी?
नागपुर के काटोल में शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कक्षा (Laxmanrao Mankar Trust Gadkari) को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने अचानक अपने काम, सेहत और सत्ता के रिश्ते पर खुलकर बात की. गडकरी ने कहा कि मैंने 30 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं.
अब मुझमें पहले जैसी भागदौड़ करने की क्षमता नहीं बची है. नई पीढ़ी को आगे आकर बड़ी जिम्मेदारी संभालनी चाहिए. उन्होंने कोविड-19 के बाद अपनी बदली दिनचर्या का जिक्र करते हुए सीधा तीर छोड़ा. उन्होंने कहा-
कि इंसान जिंदगी का असली आनंद तभी ले सकता है जब उसकी सेहत दुरुस्त हो. अगर शरीर ही साथ न दे, तो ऐसी सत्ता और पद का कोई औचित्य नहीं रह जाता.
राजनीतिक पंडित इस बयान को सिर्फ एक स्वास्थ्य अपडेट मानने को तैयार नहीं थे. हाल के दिनों में एथेनॉल नीति को लेकर हुए हमलों और कैबिनेट रीशफल की अफवाहों के बीच इसे सीधे तौर पर एक ‘भावनात्मक और रणनीतिक दांव’ के रूप में देखा गया.
ऑफिस ने तुरंत ‘डिकोड’ किया पूरा सच (Nitin Gadkari Statement Truth)
जैसे ही मीडिया में गडकरी के राजनीति छोड़ने की हेडलाइंस फ्लैश होने लगीं, गडकरी के कार्यालय ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरे मामले में बड़ा ‘यू-टर्न ट्विस्ट’ दे दिया. कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया
नितिन गडकरी किसी सरकारी या राजनीतिक पद से हटने की बात नहीं कर रहे थे. वे अपने द्वारा स्थापित ‘लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट’ के संदर्भ में बोल रहे थे. वे ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों में युवा पीढ़ी को आगे लाने की बात कह रहे थे, जिसे मीडिया ने राष्ट्रीय राजनीति और कैबिनेट से जोड़कर देख लिया.
सादगी भरा बयान या भविष्य का कोई बड़ा संकेत? (Nitin Gadkari Viral Statement)
गडकरी ने यह भी साफ किया कि वे आने वाले वर्षों में किसानों के कल्याण के लिए पहले से अधिक सक्रिय रहेंगे. भले ही दफ्तर ने इसे ट्रस्ट का आंतरिक मामला बताकर मामले को शांत करने की कोशिश की हो, लेकिन सियासी गलियारों में यह सवाल अब भी तैर रहा है कि क्या यह महज एक ट्रस्ट की बात थी, या फिर राजनीति के माहिर खिलाड़ी नितिन गडकरी ने एक तीर से कई निशाने साध दिए हैं?
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