
श्रीनगर, 22 Aug : जम्मू-कश्मीर में स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्रों की तय समय सीमा में स्थापना नहीं होने का सीधा असर अब व्यावसायिक वाहन मालिकों पर पड़ रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने आठ जिलों के परिवहन अधिकारियों की परिवहन पोर्टल तक पहुंच रोक दी है। इससे व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी और नवीनीकृत नहीं हो पा रहे हैं। नतीजतन, एक ओर वाहन संचालन प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर वाहन मालिकों पर रोजाना जुर्माने का बोझ बढ़ता जा रहा है।
परिवहन विभाग को कठुआ, उधमपुर, रियासी, श्रीनगर, पुलवामा, बडगाम, कुलगाम और गांदरबल में एक जुलाई तक स्वचालित परीक्षण केंद्र स्थापित कर उन्हें चालू करना था। लेकिन अब तक जम्मू और सांबा में केवल दो केंद्र ही संचालित हो सके हैं। इसके बाद संबंधित जिलों के परिवहन अधिकारियों की पोर्टल पहुंच रोक दी गई।
पोर्टल बंद होने से लंबित फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना रूट परमिट जारी या नवीनीकृत नहीं किया जा सकता। ऐसे में कई व्यावसायिक वाहन सड़कों से बाहर हो गए हैं। वाहन मालिकों के अनुसार, लंबित प्रमाणपत्र के कारण प्रतिदिन 25 रुपये का जुर्माना लग रहा है, जबकि रूट परमिट के नवीनीकरण पर 50 रुपये अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना देना पड़ रहा है। यानी परिवहन व्यवस्था की तकनीकी और प्रशासनिक कमी का आर्थिक बोझ वाहन मालिकों पर पड़ रहा है।
एक जुलाई से पोर्टल बंद
परिवहन अधिकारियों और वाहन मालिकों के मुताबिक, एक जुलाई से पोर्टल की पहुंच बंद है। परिवहन विभाग के आग्रह पर इस महीने एक दिन के लिए पहुंच बहाल की गई थी, जिससे कुछ लंबित प्रमाणपत्र जारी किए जा सके। इसके बाद फिर पहुंच रोक दी गई।
ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव शेख मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि अब भी सैकड़ों आवेदन लंबित हैं। उन्होंने कहा कि मामला क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कश्मीर, परिवहन आयुक्त और परिवहन सचिव के समक्ष उठाया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन के चेयरमैन शबीर अहमद मट्ट ने पोर्टल तत्काल बहाल करने और बंद अवधि में लंबित प्रमाणपत्रों के कारण लगाए गए जुर्माने माफ करने की मांग की है। उनका कहना है कि विभाग की विफलता की सजा वाहन मालिकों को भुगतनी पड़ रही है। फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं होने पर दुर्घटना की स्थिति में बीमा संबंधी दिक्कत भी खड़ी हो सकती है।
दो केंद्रों में 19000 से अधिक वाहनों की जांच
केंद्र ने वर्ष 2021 में देशभर में स्वचालित फिटनेस जांच प्रणाली लागू करने की योजना बनाई थी। इसके तहत फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया को स्वचालित परीक्षण केंद्रों से जोड़ दिया गया। जम्मू-कश्मीर में विजयपुर के बरियान, सांबा और बिश्नाह, जम्मू में निजी कंपनियों के माध्यम से दो केंद्र संचालित हैं।
इन दोनों केंद्रों पर अब तक केंद्र शासित प्रदेश के 19,347 वाहनों की जांच की जा चुकी है और इससे 7,14,71,725 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
परिवहन आयुक्त विशाल पाल महाजन के अनुसार, कश्मीर में अभी तक कोई स्वचालित परीक्षण केंद्र पूरा नहीं हुआ है। पिछले वर्ष नवंबर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत एक केंद्र की आधारशिला रखी थी, जिसके पूरा होने में 18 महीने से अधिक लग सकते हैं। श्रीनगर के बेमिना क्षेत्र में मोटर गैरेज विभाग के पास एक केंद्र के लिए गुजरात की एक कंपनी ने जमीन की मांग की है।
जम्मू के दो केंद्रों पर दबाव
जम्मू ट्रांसपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सिंह चिब ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जम्मू में मौजूद दो केंद्र दूसरे जिलों से आने वाले वाहनों की बड़ी संख्या का दबाव कैसे संभालेंगे। वाहन मालिकों के लिए फिटनेस जांच कराने सैकड़ों किलोमीटर दूर जम्मू पहुंचना व्यावहारिक नहीं है।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कश्मीर में स्वचालित परीक्षण केंद्र अभी तैयार ही नहीं हैं, तो वहां के वाहन मालिकों को पोर्टल बंद करके दंडित क्यों किया जा रहा है। परिवहन मंत्री सतीश शर्मा, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कश्मीर और परिवहन सचिव से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। अब सरकार के सामने तत्काल चुनौती पोर्टल बहाल करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर पर्याप्त परीक्षण केंद्र तैयार करने और प्रभावित वाहन मालिकों को आर्थिक राहत देने की है।






