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लखनऊ, 6 Aug : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है. सभी राजनीतिक दल अपने-अपने संगठन को दुरुस्त करने में जुटे हैं, लेकिन एनडीए की सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने अपनी चुनावी तैयारियों के तहत एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है.
पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी के मार्गदर्शन में रालोद के प्रदेश नेतृत्व ने अपने सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों की लिखित परीक्षा ली है. भारतीय राजनीति में शायद यह पहली बार है जब किसी राजनीतिक दल ने अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों को आंकने के लिए बाकायदा पेन-पेपर वाली परीक्षा आयोजित की है.
क्या था परीक्षा का मकसद? (Jayant Chaudhary RLD test)
लखनऊ स्थित रालोद प्रदेश मुख्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा की मौजूदगी में सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों की समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. इसी बैठक के दौरान अचानक क्षेत्रीय अध्यक्षों के सामने ‘प्रश्नपत्र’ रख दिया गया.
पार्टी प्रवक्ता रोहित अग्रवाल के अनुसार, इस लिखित परीक्षा का मुख्य उद्देश्य संगठन को बूथ स्तर तक चुस्त-दुरुस्त और सक्रिय बनाना था. पार्टी यह जांचना चाहती थी कि उसके क्षेत्रीय अध्यक्षों को अपने-अपने इलाकों के जमीनी राजनीतिक हालात, चुनावी मुद्दों और पार्टी की नीतियों की कितनी गहरी समझ है.
नेताओं से क्या-क्या सवाल पूछे गए? (RLD leaders written test questions)
परीक्षा और उसके बाद हुई व्यक्तिगत समीक्षा बैठकों के दौरान रालोद नेतृत्व ने क्षेत्रीय अध्यक्षों से बेहद तीखे और संगठनात्मक सवाल पूछे, जिनसे उनका रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया.
- आपने अपने अब तक के कार्यकाल में संगठन के विस्तार के लिए धरातल पर क्या-क्या काम किए हैं?
- भविष्य में पार्टी की प्राथमिकताओं पर काम करने के लिए आपके पास क्या योजनाएं और विजन हैं?
- आपके क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिलों में महिला प्रकोष्ठ और अन्य विशेष विंग्स का गठन कब तक पूरा कर लिया जाएगा?
- संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?
- आपके क्षेत्र में स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां कैसी हैं और क्षेत्रीय मुद्दों पर पार्टी की क्या पकड़ है?
काम करने वालों को ही मिलेगी तरजीह (RLD organization review meeting)
बैठक के दौरान कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा ने स्पष्ट कर दिया कि अब संगठन में केवल पदों पर बने रहने की परिपाटी खत्म होगी. उन्होंने कहा कि प्रत्येक पदाधिकारी के कामकाज की नियमित समीक्षा होगी और जवाबदेही तय की जाएगी. संगठन में समर्पित होकर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी.
वहीं प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने कहा कि आने वाले समय में जिलों, शहरों और महानगर इकाइयों का विस्तार करते हुए लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का हर कार्यकर्ता पूरी तरह से तैयार हो सके.
एनडीए के साथ 2027 की बड़ी चुनौती (RLD booth level strategy)
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल का भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) के साथ गठबंधन है. पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव एनडीए गठबंधन के तहत ही लड़ा जाएगा. पश्चिम यूपी के अपने मजबूत जनाधार को पूरे प्रदेश में फैलाने और एनडीए गठबंधन में अपनी सीटों की दावेदारी मजबूत करने के लिए आरएलडी की यह ‘नेताजी की परीक्षा’ एक बड़ा और असरदार दांव मानी जा रही है.
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