
उत्तर प्रदेश , 16 July : उत्तर प्रदेश के रामपूर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का इतिहास इसके नींव रखने से ही विवादित रहा है. अब इसी बीच एक बार फिर से ये विवादों से घिर गया है. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट कही जाने वाली इस यूनिवर्सिटी के 38 इमारतों को रामपुर विकास प्राधिकरण ने अवैध पाया है. इन इमारतों में कई एकेडमिक विभाग, लेबोरेटरी और अन्य सुविधाएं हैं. जानें आखिर क्या है नया विवाद?
क्या है विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ इस यूनिवर्सिटी का नक्शा और उस पर दी गई मंजूरी है. रामपुर विकास प्राधिकरण के अनुसार यूनिवर्सिटी के अंदर बने 38 इमारतों के लिए कभी मंजूरी ही नहीं ली गई थी. जब यूनिवर्सिटी की नींव रखी गई, तब यह इलाका जिला पंचायत के अधीन आता था. नियमों के अनुसार, किसी भी निर्माण से पहले जिला पंचायत से मंजूरी लेना अनिवार्य था.
बाद में जब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के दायरे में आया, तो जांच में पाया गया कि मेडिकल कॉलेज को छोड़कर हॉस्टल, लैब और कई एकेडमिक ब्लॉकों का निर्माण बिना किसी वैध अनुमति के किया गया है. इसी आधार पर प्राधिकरण ने यूपी शहरी योजना एवं विकास अधिनियम के तहत इन इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया है.
RDA के साथ इनकम टैक्स की भी पड़ी मार
इसी बीच यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगी रकम को लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी इसे घेर लिया है. यूनिवर्सिटी का संचालन करने वाले मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का कहना है कि पूरे निर्माण पर महज 46 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया है.
वहीं विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा किए गए वैल्यूएशन में इसकी निर्माण लागत लगभग 496 करोड़ रुपये आंकी गई.
इतना ही नहीं, सपा सरकार के समय श्रम विभाग ने इसकी अनुमानित लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई थी.
यूनिवर्सिटी के निर्माण में इतने भारी अंतर और फंडिंग के स्रोतों को लेकर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये के टैक्स नोटिस थमाए जा चुके हैं.
कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी
एक तरफ जहां आयकर विभाग पैसों का हिसाब मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ अवैध निर्माण का ठप्पा लगाकर प्रशासन इमारतें ढहाने पर आमादा है. हालांकि, जौहर ट्रस्ट इस आदेश के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है.






