
जम्मू, 26 June : लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने परियोजनाओं की मंजूरी और फाइलों के निपटारे में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए वित्त विभाग में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल किया है। उन्होंने वित्त सचिव एल फ्रैंकलिन सहित लगभग दो दर्जन अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर विभाग के पुनर्गठन के आदेश जारी किए हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 16 जून को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने परियोजनाओं की स्वीकृति और फाइलों की मंजूरी में हो रही अनावश्यक देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने पाया कि विभिन्न स्तरों पर फाइलों पर बार-बार गैर-जरूरी आपत्तियां और सवाल उठाए जा रहे थे, जिससे मामलों का लंबित रहना बढ़ रहा था और विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे।
वित्त विभाग का पूरा ढांचा बदला
उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि शीर्ष स्तर से फाइलों के शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए जाने के बावजूद सचिव स्तर पर प्रभावी निगरानी का अभाव रहा है। इसी के मद्देनजर वित्त सचिव के अलावा संयुक्त निदेशक वित्त, चीफ अकाउट्स आफिसर तथा अकाउट्स आफिसरों का भी तबादला किया गया है।
बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने कहा कि वित्त विभाग में लंबित फाइलों के कारण विकास एवं विभागीय परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और वित्तीय मामलों के निपटारे में तेजी लाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर दिया।
नए ढांचे के तहत आंतरिक वित्त प्रभाग और वित्त विभाग के ओपिनियन सेक्शन में तैनात संयुक्त निदेशक एवं मुख्य लेखा अधिकारियों को विभिन्न विभागों के लिए नामित आंतरिक वित्त अधिकारी बनाया गया है। ये अधिकारी संबंधित विभागों के वित्तीय अनुमोदन, वित्तीय सलाह, बैंक खाते खोलने, नीतियों की जांच तथा अन्य वित्तीय मामलों की सीधे समीक्षा और प्रक्रिया पूरी करेंगे।
लंबित फाइलों पर जवाबदेही तय
इसके अलावा, इन अधिकारियों की सहायता के लिए लेखा अधिकारियों की भी आईएफडी में तैनाती की गई है। नई व्यवस्था के तहत मामलों की सीधे जांच होगी, जिससे अनावश्यक स्तरों पर होने वाली दोहरावपूर्ण जांच कम होगी और प्रस्तावों के निपटारे में तेजी आएगी। सूत्रों ने बताया कि इस पुनर्गठन का उद्देश्य वित्तीय मामलों में प्रक्रियागत देरी को कम करना, निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाना, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा वित्तीय अनुमोदन प्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है।
उपराज्यपाल ने सभी विभागाध्यक्षों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की जानबूझकर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मुख्य सचिव को भी निर्देश दिए हैं कि फाइलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए और अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
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