
श्रीनगर , 26 June : कृषि नवाचार और जलवायु-अनुकूल बागवानी के क्षेत्र में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर (SKUAST-K) ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
विश्वविद्यालय को स्मार्ट एंटी-हेल नेट सिस्टम के लिए भारत सरकार से पेटेंट प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त कुल पेटेंट की संख्या 125 तक पहुंच गई है, जो अनुसंधान, नवाचार और तकनीक के व्यावसायीकरण की दिशा में उसकी बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
भारत सरकार के बौद्धिक संपदा कार्यालय ने पेटेंट संख्या 593446 के तहत इस तकनीक को 20 वर्षों के लिए कानूनी संरक्षण प्रदान किया है। यह पेटेंट 11 दिसंबर 2023 को दायर आवेदन संख्या 202311084347 के आधार पर स्वीकृत किया गया।
सकास्ट-के, के इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप सेंटर में विकसित यह स्मार्ट प्रणाली अत्याधुनिक सेंसर और रियल-टाइम मौसम निगरानी तकनीक पर आधारित है। जैसे ही ओलावृष्टि की आशंका होती है, यह प्रणाली स्वतः सक्रिय होकर बागों पर सुरक्षा जाल (नेट) फैला देती है।
सामान्य एंटी-हेल नेट की तुलना में यह तकनीक केवल आवश्यकता पड़ने पर ही सक्रिय होती है, जिससे श्रम, समय और संचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। इस नवाचार को राजा वसीम नज़ीर, डॉ. शोकत रसूल, शाह हारिस नबी, प्रो खालिद मुश्ताक, प्रो. हारून आर नाइक और डा नवेद हमीद की टीम ने विकसित किया। इस परियोजना को विश्वविद्यालय के नवाचार तंत्र का संस्थागत सहयोग भी प्राप्त हुआ।
ढाई वर्षों की मेहनत के बाद मिली सफलता
शोधकर्ताओं के अनुसार इस तकनीक को विकसित करने में लगभग एक वर्ष का समय लगा, जबकि पेटेंट स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया करीब ढाई वर्षों में पूरी हुई। इसका परीक्षण विश्वविद्यालय के शालीमार हाई डेंसिटी प्लांटेशन ऑर्चर्ड में सफलतापूर्वक किया गया।
सकासट-के, के इनोवेशन इन्क्यूबेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप सेंटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रमुख डॉ. नवीद हमीद ने कहा कि यह तकनीक बागवानी क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी नवाचार साबित होगी।
उन्होंने कहा, ‘यह किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी तकनीक है। अब हम इसे व्यावसायिक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं, ताकि उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार हो सके।’
जलवायु परिवर्तन के दौर में बड़ी राहत
पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर में जलवायु परिवर्तन के कारण ओलावृष्टि की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। विशेषकर फूल आने और फल बनने के समय होने वाली ओलावृष्टि कुछ ही मिनटों में किसानों की पूरी फसल को भारी नुकसान पहुंचा देती है।
दक्षिण कश्मीर के शोपियां, पुलवामा और कुलगाम जैसे प्रमुख सेब उत्पादक जिलों में कई बार किसानों को 30 से 70 प्रतिशत तक फसल नुकसान झेलना पड़ा है। ऐसे में यह स्मार्ट प्रणाली किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी।
कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूती
कश्मीर में हर वर्ष 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब उत्पादन होता है और लगभग सात लाख किसान परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष रूप से बागवानी पर निर्भर है। इसके अलावा परिवहन, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और व्यापार से जुड़े लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी भी इसी क्षेत्र से जुड़ी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया गया तो न केवल फसल नुकसान में भारी कमी आएगी, बल्कि किसानों की आय स्थिर होगी, बेहतर गुणवत्ता के फल तैयार होंगे और कश्मीर की बागवानी अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
किसानों और देश को होंगे ये प्रमुख लाभ
- ओलावृष्टि से सेब और अन्य फलों की समय पर स्वचालित सुरक्षा।
- श्रम लागत और मानवीय हस्तक्षेप में कमी।
- फसल नुकसान घटने से किसानों की आय में वृद्धि।
- जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों का प्रभावी समाधान।
- उच्च गुणवत्ता वाले फलों के उत्पादन से निर्यात और बाजार मूल्य में बढ़ोतरी।
- कृषि क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा।
- विश्वविद्यालय आधारित अनुसंधान को उद्योग और किसानों तक पहुंचाने का मजबूत मॉडल।
अनुसंधान और नवाचार की नई पहचान
डॉ. नवीद हमीद ने बताया कि यह उपलब्धि केवल एक पेटेंट तक सीमित नहीं है। सकासट-के अब 125 पेटेंट प्राप्त कर चुका है, जो विश्वविद्यालय में अनुसंधान, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार आधारित विकास की नई पहचान बन चुका है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो नज़ीर अहमद गनई, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों को दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्मार्ट एंटी-हेल नेट प्रणाली के व्यापक उपयोग से कश्मीर ही नहीं, बल्कि देश के अन्य पर्वतीय और बागवानी क्षेत्रों में भी जलवायु जनित जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। यह तकनीक भारतीय कृषि को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।






