
Foriegn Desk , 28 Mar : मिडल ईस्ट में छिड़ी जंग और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर मंडराते खतरों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत(Modi-Trump Call) को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चल रही अटकलों पर भारत ने अपनी स्थिति साफ कर दी है. दरअसल भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता ने आज स्पष्ट किया कि 24 मार्च को हुई यह टेलीफोनिक बातचीत केवल प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच ही थी.
बता दें कि विदेश मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि इस बातचीत में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और टेक दिग्गज एलन मस्क भी शामिल थे. मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि यह एक द्विपक्षीय संवाद था जिसका मुख्य केंद्र बिंदु मध्य पूर्व के मौजूदा हालात और वैश्विक शांति बहाली था.
मस्क की मौजूदगी पर क्यों मचा बवाल?
दरअसल अमरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी एक रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा किया था कि ट्रंप और मोदी की इस कॉल में एलन मस्क भी लाइन पर थे. रिपोर्ट में तर्क दिया गया था कि मस्क के स्पेस, एनर्जी और टेक्नोलॉजी साम्राज्य का खाड़ी देशों और भारत पर बड़ा प्रभाव है इसलिए वे इस चर्चा का हिस्सा बने.
साथ ही इसे ट्रंप और मस्क के बीच सुधरते रिश्तों के संकेत के रूप में भी पेश किया गया था. हालांकि अब भारत सरकार के आधिकारिक बयान ने इन तमाम दावों को ‘फिक्शन’ करार देते हुए स्पष्ट किया कि कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत यह चर्चा दो राष्ट्र प्रमुखों के बीच ही सीमित थी.
मोदी-ट्रंप की रणनीतिक चर्चा का क्या था केंद्र?
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई इस बातचीत(Modi-Trump Call) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की सुरक्षा था. भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से मंगाता है. ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने इस समुद्री मार्ग को जोखिम में डाल दिया है.
वहीं पीएम मोदी ने शनिवार को एक सार्वजनिक संबोधन में भी इस बात का जिक्र किया कि सरकार हर संभव कदम उठा रही है ताकि वैश्विक तेल संकट का बोझ भारत के सामान्य परिवारों और किसानों पर न पड़े. ट्रंप के साथ बातचीत में भी मोदी ने ‘डी-एस्केलेशन’ यानी तनाव कम करने और शांति बहाली पर जोर दिया ताकि वैश्विक सप्लाई चेन बाधित न हो.







