
आध्यात्म , 31 Jan : माघ का महीना हिंदू धर्म और आध्यात्म की दृष्टि से काफी खास माना जाता है. इस बार ये पावन तिथि 1 फरवरी 2026 को पड़ रही है और फरवरी के महीने में ये सबसे बड़ा आस्था का उत्सव माना जा रहा है. अकसर लोग कहते हैं कि इस दिन सुबह गंगा स्नान और पूजा पाठ करने सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा पर रात में किए गए दान का काफी विशेष महत्व है?
कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान भगवान की सेवा से बराबर है और पिछले जन्मों के सारे बुरे कर्म इस दान से कम हो जाते हैं. आइए जानते हैं कि इस साल माघ पूर्णिमा के दिन आपको कौन-कौन से उपाय करने चाहिए.
चांदनी रात में सकारात्मक ऊर्जा का मेल
धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो माघ पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सारी 16 कलाओं के साथ आसमान में चमकता है. कहा जाता है कि इस रात वातावरण में एक खास तरह की सकारात्मक ऊर्जा होती है. पुरानी मान्यताओं के अनुसार देवा देवता इस शुभ दिन पर खुद धरती पर भ्रमण करने के लिए आते है. इसीलिए इस दिन रात को किए गए दान से न सिर्फ आपको और आपके पूरे परिवार को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इसका शुभ फल मिलता है.
क्या दान करना रहेगा सबसे अच्छा?
अगर आप दान की योजना बना रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि आपकी मदद सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे. माघ पूर्णिमा पर निम्नलिखित चीजों का दान बेहद फलदायी होता है:
अन्न और गुड़: घर में बरकत और सुख-शांति के लिए.
तिल और घी: शारीरिक कष्टों से मुक्ति के लिए.
गर्म कपड़े और कंबल: चूंकि फरवरी की शुरुआत में ठंड बरकरार रहती है, इसलिए गरीबों को कंबल देना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है.
वस्त्र दान: समाज में मान-सम्मान बढ़ाने के लिए.
मान्यता है कि इन चीजों का दान करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि घर की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है.
दान करते समय न करें ये गलतियां
दान देना सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक भावना है. अगर आप दान दे रहे हैं, तो कुछ नियमों का पालन जरूर करें:
गोपनीयता रखें: दान का ढिंढोरा न पीटें. कहा जाता है कि ‘नेकी कर दरिया में डाल’, यानी गुप्त दान का फल सबसे ज्यादा होता है.
सही हाथ का उपयोग: हमेशा अपने दाएं हाथ से दान दें और मन में ईश्वर का ध्यान करें.
अहंकार से बचें: दान देते समय मन में यह भाव न आने दें कि आप किसी पर उपकार कर रहे हैं. क्रोध या जल्दबाजी में दिया गया दान अक्सर अपना फल खो देता है.
पश्चाताप न करें: एक बार कुछ देने के बाद उसके बारे में अफसोस न करें, बल्कि खुशी-खुशी उसे त्याग दें.







