
मिजोरम , 29 Jan : भारत के नक्शे पर जब हम सबसे शिक्षित इलाकों की तलाश में निकलते हैं तो अक्सर हमारा ध्यान केरल या बड़ें शहरों की और जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं हमारे देश भारत में शिक्षा का असली गढ़ कौन-सा है. ये कोई बहुत बड़ा जाना-माना शहर नहीं है, ये एक ऐसी जगह है जहां का नाम आपने शायद ही कभी सुना होगा. जी हां, हम बात कर रहे हैं मिजोरम के सेरछिप जिले की, जिसने पढ़ाई-लिखाई के मामले में पूरे देश को पीछे छोड़ दिया है.
वो जगह जहां ‘जीनियस’ बसते हैं
मिजोरम का ये छोटा सा जिला अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन इस जगह की असली पहचान यहां के लोग हैं. साल 2011 के जनगणना आंकड़ों पर नजर डालें तो सेरछिप का साक्षरता दर 97.91% दर्ज किया गया था, जिससे ये देश के सबसे ज्यादा शिक्षित जिलों में से एक बनाता है.
हैरानी की बात ये है कि यहां शिक्षा सिर्फ कागजों पर ही नहीं बल्कि लोगों के व्यवहार में भी दिखती है. यही वजह है कि इसे देश का सबसे बड़ा ‘ब्रेन हब’ या जीनियस पैदा करने वाला जिला भी कहा जाने लगा है.
मिजोरम ने रचा नया इतिहास
शिक्षा के प्रति इस राज्य का जुनून यहीं खत्म नहीं होता. हाल ही में, साल 2025 में मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा की. मिजोरम अब 100% साक्षरता की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है. शिक्षा मंत्रालय ने पूरी साक्षरता के लिए 95% का मानक तय किया था, लेकिन मिजोरम ने इसे पछाड़ते हुए 98.2% का प्रभावशाली आंकड़ा छू लिया है.
शिक्षा की रेस में टॉप जिले
अगर हम देश के अन्य सबसे पढ़े-लिखे जिलों की बात करें, तो मुकाबला काफी कड़ा है-
आइजोल (मिजोरम): 97.89% साक्षरता के साथ यह देश में दूसरे नंबर पर है.
माहे (पुडुचेरी): यहां की साक्षरता दर 97.87% है, जो इसे तीसरे स्थान पर रखती है.
कोट्टयम और पतनमतिट्टा (केरल): ये दोनों जिले क्रमश: चौथे और पांचवें स्थान पर हैं, जहां शिक्षा की दर 97% के पार है.
वहीं अगर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की बात करें, तो वहां गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) सबसे आगे है. 2011 के आंकड़ों के अनुसार यहां की साक्षरता दर 90.12% रही, जो उत्तर भारत के हिसाब से काफी बेहतर मानी जाती है.







