
27 Jan : भारत और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच व्यापारिक रिश्तों के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है. जिस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का इंतजार पिछले 18-20 सालों से किया जा रहा था, उस पर आखिरकार मुहर लग गई है. नई दिल्ली में लंबी बातचीत और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद इस डील को फाइनल किया गया. पीएम मोदी ने गोवा में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी वीक-2026’ के मंच से इसका औपचारिक ऐलान करते हुए इसे दुनिया के लिए “मदर ऑफ ऑल डील्स” (Mother of All Deals) करार दिया है.
यह समझौता(India EU FTA Details) केवल कागजी दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोपीय देशों के करोड़ों नागरिकों के लिए व्यापार, रोजगार और सस्ती वस्तुओं का एक नया अवसर लेकर आया है.
क्यों खास हैं ये डील्स? (What India EU FTA)
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. भारत के कुल वैश्विक व्यापार का करीब 17% हिस्सा अकेले ईयू के साथ होता है. पिछले दो दशकों से दोनों पक्ष टैरिफ, बाजार तक पहुंच और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एकमत नहीं हो पा रहे थे. लेकिन अब, भू-राजनीतिक समीकरणों और भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत ने इन डील्स को संभव बना दिया है. यह समझौता वैश्विक जीडीपी के लगभग 25% और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है.
आम आदमी के लिए खुशखबरी (India EU FTA Details)
इस समझौते का सबसे रोचक पहलू ऑटोमोबाइल सेक्टर है. अब तक भारतीय कार बाजार को दुनिया के सबसे संरक्षित बाजारों में गिना जाता था.
क्या बदलेगा: फिलहाल यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर उनकी कीमत और मॉडल के आधार पर 70% से 100% तक आयात शुल्क (Import Duty) लगता था. इसी वजह से ऑडी, बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी गाड़ियां भारत में अपनी वास्तविक कीमत से दोगुनी महंगी मिलती थीं.
नई व्यवस्था: रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार 16 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों पर आयात शुल्क घटाकर 40% करने पर सहमत हो गई है. इसका सीधा मतलब है कि भारत में यूरोपीय लग्जरी कारें पहले के मुकाबले काफी सस्ती हो सकती हैं. इससे भारतीय ऑटो सेक्टर में भी टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और इनोवेशन का दबाव बढ़ेगा.
बांग्लादेश-वियतनाम को चुनौती
FTA का दूसरा सबसे बड़ा फायदा भारत के कपड़ा (Textile) और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को होगा. वर्तमान में यूरोपीय यूनियन में भारतीय कपड़ों पर करीब 10% सीमा शुल्क लगता है, जिससे भारतीय उत्पाद महंगे हो जाते थे और बांग्लादेश या वियतनाम (जिन्हें ड्यूटी फ्री एक्सेस है) बाजी मार ले जाते थे.
एफटीए लागू होने के बाद भारतीय कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों पर यह शुल्क चरणबद्ध तरीके से खत्म होगा. इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोप के विशाल बाजार में सीधी और सस्ती एंट्री मिलेगी, जिससे देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी और लाखों नए रोजगार पैदा होंगे.
हम खरीद कम, बेच ज्यादा रहे हैं
यह समझौता भारत के लिए घाटे का सौदा नहीं है, बल्कि आंकड़ों के लिहाज से भारत ‘सरप्लस’ में है. वित्त वर्ष 2024-25 का लेखा-जोखा देखें तो भारत और ईयू के बीच कुल व्यापार 136.53 अरब डॉलर का रहा. आईटी और सेवाओं के मामले में भी दोनों के बीच 83.10 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है, जो इसके बाद और बढ़ेगा.
- निर्यात (Export): भारत ने ईयू को 75.85 अरब डॉलर का सामान बेचा.
- आयात (Import): भारत ने ईयू से 60.68 अरब डॉलर का सामान खरीदा.
- मुनाफा: ईयू के साथ करीब 15.17 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस हासिल हुआ है.
इंडिया एनर्जी वीक में पीएम मोदी का विजन (India EU FTA PM Modi Vision)
गोवा में ‘इंडिया एनर्जी वीक-2026’ का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति बन चुका है. उन्होंने कहा कि कल ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है. दुनिया में लोग इसकी चर्चा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के रूप में कर रहे हैं. यह डील्स भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करेगी और सर्विस सेक्टर को नया सहारा देगी. पीएम मोदी ने यह भी बताया कि यह एफटीए भारत और ब्रिटेन (UK) के बीच चल रही ट्रेड पार्टनरशिप को भी सपोर्ट करेगा.







