
प्रयागराज , 23 Jan : प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे संत समाज को हिलाकर रख दिया है. शंकराचार्य के सम्मान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शांत होने के बजाय और गहराता जा रहा है. इस मामले में अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है.
दिनेश फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने खून से चिट्ठी लिखी है. उन्होंने अपने रक्त से पत्र लिखकर मांग की है कि शंकराचार्य को पूरे मान-सम्मान के साथ गंगा स्नान कराया जाए.
हिंदुओं की आस्था पर चोट का आरोप
खून से लिखी इस चिट्ठी में फलाहारी महाराज ने सीएम योगी को संबोधित करते हुए कहा कि आप खुद एक महान सनातनी महंत हैं और हिंदुओं के गौरव हैं. वहीं, शंकराचार्य हिंदू समाज के सर्वोच्च धर्मगुरु हैं, जिनका स्थान सबसे ऊपर है. उन्होंने याद दिलाया कि जब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंकराचार्य के चरण स्पर्श करते हैं, तो फिर मेले में तैनात अधिकारियों की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जाए?
महाराज ने आरोप लगाया कि माघ मेले के दौरान जो वीडियो सामने आए हैं, वे चीख-चीख कर कह रहे हैं कि कुछ अधिकारियों ने साधु-संतों का अपमान किया है. उनके मुताबिक, शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोकना न सिर्फ परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि यह करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था पर चोट करने जैसा है.
अफसरों की माफी ही एकमात्र समाधान
इस पूरे विवाद को सुलझाने का रास्ता बताते हुए दिनेश फलाहारी महाराज ने साफ कहा कि अब बात सिर्फ आश्वासन से नहीं बनेगी. उन्होंने मांग की है कि जिन अधिकारियों ने मर्यादा लांघी है, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी. पत्र में चेतावनी के लहजे में यह भी लिखा गया है कि इस विवाद की वजह से हिंदू समाज में भारी नाराजगी है, जिसका फायदा विपक्षी दल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए उठा सकते हैं.
उनका कहना है,
“अधिकारियों से बड़ी गलती हुई है और उन्हें अपनी भूल स्वीकार करनी चाहिए. जब तक शंकराचार्य को ससम्मान गंगा स्नान नहीं कराया जाता, तब तक सनातन समाज की यह पीड़ा शांत नहीं होगी.”
इस समय यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है. संतों का कहना है कि प्रशासन को यह समझना होगा कि कुंभ और माघ मेला संतों की वजह से ही है. अगर वहां संतों का ही अपमान होगा, तो फिर आयोजन की भव्यता का कोई मोल नहीं रह जाता है.







